देवघर। झारखंड की 13वीं/14वीं JPSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच कर रही CID ने देवघर में बड़ी कार्रवाई की है। मोहनपुर थाना क्षेत्र से CID की टीम ने सुधाकर यादव नामक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा में पास कराने और नौकरी दिलाने के नाम पर कथित सेटिंग कराने वाले नेटवर्क से जुड़ा था। कार्रवाई में मोहनपुर थाना पुलिस ने CID टीम का सहयोग किया।
करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों से सेटिंग का आरोप
मोहनपुर थाना प्रभारी संदीप कृष्ण ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। पुलिस के मुताबिक, CID से मिली सूचना के आधार पर संयुक्त कार्रवाई कर सुधाकर यादव को पकड़ा गया।
जांच में उसके द्वारा करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों के साथ कथित तौर पर सेटिंग किए जाने की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, नेटवर्क में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी, यह CID की विस्तृत जांच के बाद ही साफ होगा।
1200 अभ्यर्थियों को एक जगह जुटाने का भी दावा
जांच के दौरान एक और अहम जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। अलग-अलग जिलों के करीब 1200 अभ्यर्थियों को एक स्थान पर एकत्रित कर परीक्षा से जुड़े सवाल-जवाब रटाए जाने की बात जांच एजेंसी के सामने आई है।
CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कौन-कौन लोग थे और सुधाकर यादव की इसमें क्या भूमिका रही।
2018 से सचिवालय में क्लर्क के पद पर है कार्यरत
बताया जा रहा है कि गिरफ्तार सुधाकर यादव 2018 से रांची सचिवालय में लिपिक के पद पर कार्यरत है। गिरफ्तारी के बाद CID ने उसके बैंक खातों, मोबाइल फोन और संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी खंगालनी शुरू कर दी है।
जांच एजेंसी कथित आर्थिक लेन-देन के साथ-साथ परीक्षा में अनियमितता से जुड़े दूसरे कनेक्शनों की भी पड़ताल कर रही है।
ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले गई CID
गिरफ्तारी के बाद CID की टीम सुधाकर यादव को ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले गई, जहां उससे पूरे मामले को लेकर पूछताछ की जाएगी। पूछताछ के दौरान कथित परीक्षा नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार ने CID को सौंपी है जांच
13वीं/14वीं JPSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार की ओर से CID जांच की बात कही गई थी। इसके बाद से जांच एजेंसी लगातार मामले की पड़ताल कर रही है।
देवघर से हुई यह गिरफ्तारी जांच के लिहाज से अहम मानी जा रही है। हालांकि, सुधाकर यादव पर लगे आरोप और उसकी वास्तविक भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।



