हिसार: हरियाणा के लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा के नाम पर अधिकारियों और भाजपा नेताओं को फोन कर कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने का दबाव बनाने वाले साइबर ठगों का हिसार पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। आरोपियों ने खुद को मंत्री रणबीर सिंह गंगवा बताकर प्रदेश के कई अधिकारियों और भाजपा नेताओं को फोन किए और अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए सहयोग करने की मांग की।

मामले में मंत्री के निजी सहायक (PA) अरुण कुमार की शिकायत पर हिसार साइबर क्राइम थाना पुलिस ने IT Act के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। तकनीकी जांच और लोकेशन ट्रेसिंग के आधार पर पुलिस ने राजस्थान के अलवर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में इनके संभावित सरगना और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

अंबाला के SE से लेकर गुरुग्राम के SDO तक पहुंचा फर्जी फोन

जांच के अनुसार, आरोपियों ने 18 जुलाई को पहली बार खुद को मंत्री रणबीर सिंह गंगवा बताकर अंबाला के लोक निर्माण विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (SE) और गुरुग्राम के पीडब्ल्यूडी विभाग के एक अधिकारी (SDO) को फोन किया।

फोन करने वाले ने खुद को मंत्री बताते हुए अधिकारियों से सहयोग की बात कही और अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए कथित तौर पर मदद करने को कहा।

इसके बाद पानीपत और करनाल के भाजपा जिलाध्यक्षों समेत कई अन्य लोगों को भी इसी तरह फोन किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने अधिकारियों, नेताओं और अन्य प्रभावशाली लोगों को फोन किया और उनसे किस तरह का काम करवाने का प्रयास किया।

Truecaller पर मंत्री का नाम, DP में लगी थी मंत्री की फोटो

आरोपियों ने लोगों को भ्रमित करने के लिए जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया, उसे Truecaller पर सर्च करने पर मंत्री रणबीर सिंह गंगवा का नाम दिखाई देता था। इतना ही नहीं, नंबर की प्रोफाइल फोटो में भी मंत्री की तस्वीर लगी हुई थी।

ऐसे में किसी अधिकारी या नेता के लिए पहली नजर में यह पहचानना मुश्किल हो सकता था कि फोन वास्तव में मंत्री की ओर से नहीं किया जा रहा है।

पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड हासिल किया था। अब पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि फर्जी पहचान के आधार पर सिम कैसे जारी हुआ और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।

मंत्री के करीबी को फोन पहुंचा तो खुल गया पूरा खेल

मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब 20 जुलाई को मंत्री के करीबी मित्र और पूर्व चेयरमैन सतबीर वर्मा को भी इसी संदिग्ध नंबर से फोन आया।

सतबीर वर्मा को बातचीत और फोन करने वाले के व्यवहार पर संदेह हुआ। उन्होंने संदिग्ध नंबर पर वापस कॉल किया। सामने वाले ने बेझिझक खुद को कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा बताया।

इसके बाद सतबीर वर्मा ने सीधे मंत्री से संपर्क कर पूरे मामले की पुष्टि की। इसी तरह, जिन भाजपा जिलाध्यक्षों को फोन आए थे, उन्होंने भी सीधे मंत्री से बातचीत कर फोन की सच्चाई की पुष्टि की। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

21 जुलाई को दर्ज हुई FIR, दो दिन में अलवर से गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री के निजी सहायक अरुण कुमार ने 21 जुलाई को हिसार साइबर क्राइम थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबर के आधार पर तकनीकी जांच शुरू की।

पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी इनपुट के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद 23-24 जुलाई के दौरान राजस्थान के अलवर जिले के नाडका गांव से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है।

‘पैसे ऐंठने से पहले ही पकड़े गए आरोपी’

राहत की बात यह रही कि आरोपियों ने कथित तौर पर किसी से पैसे ऐंठने से पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए। हालांकि, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपियों ने मंत्री की पहचान का इस्तेमाल कर किसी अधिकारी या नेता से कोई अनुचित काम करवाया या किसी अन्य प्रकार का लाभ लेने का प्रयास किया।

मामले की जांच अब इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि आरोपियों ने मंत्री के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर कितने लोगों को फोन किया, उन्हें किस तरह का भरोसा दिलाया गया और क्या इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा साइबर नेटवर्क काम कर रहा था।

मंत्री के नाम पर फर्जी कॉल का यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोपियों ने केवल आम लोगों को नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक दल के वरिष्ठ पदाधिकारियों को निशाना बनाने का प्रयास किया। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।