शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय और ग्राम पंचायत चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस जैसे बड़े दलों की टेंशन बढ़ाने के लिए अब सपाक्स ने भी पूरी तरह कमर कस ली है। भोपाल में आयोजित सपाक्स की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया है कि पार्टी पूरे प्रदेश में पंचायत से लेकर नगर निगम तक के चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ेगी।

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राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में रणनीतिक फैसला

सपाक्स की इस महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े पदाधिकारी और प्रमुख चेहरे शामिल हुए। बैठक में सपाक्स के प्रमुख नेता हीरालाल त्रिवेदी, वीणा घाड़ेकर और एडवोकेट अनिल मिश्रा मुख्य रूप से शामिल हुए, जिनकी मौजूदगी में चुनावी रोडमैप तैयार किया गया। इस बैठक में सपाक्स ने यूजीसी के कुछ नियमों का कड़ा विरोध किया। इसके साथ ही पार्टी ने अपनी पुरानी मांग को दोहराते हुए आरक्षण व्यवस्था का विरोध किया और ‘पदोन्नति में एक परिवार, एक बार’ का लाभ देने की वकालत की।

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तीसरे विकल्प के रूप में बीजेपी-कांग्रेस को देगी चुनौती

सपाक्स के इस ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के स्थानीय चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। पार्टी का मुख्य फोकस सामान्य, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के मुद्दों को उठाकर जमीन पर पकड़ मजबूत करना है। जमीनी स्तर तक चुनाव लड़ने के इस फैसले ने निश्चित रूप से दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के समीकरणों को बिगाड़ने का संकेत दे दिया है।

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