मुंगेर। जिले से स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक लापरवाही का एक मामला सामने आया है। यहां सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक युवक के शव को सरकारी वाहन न मिलने के कारण परिजनों को मजबूरन ई-रिक्शा पर रस्सी से बांधकर करीब 30 किलोमीटर दूर उनके पैतृक गांव ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सड़क हादसे में हुई थी तीन युवकों की मौत
यह दर्दनाक घटना बरियारपुर-हवेली खड़गपुर एनएच-333 पर हुई, जहां दो तेज रफ्तार बाइकों की आमने-सामने की जोरदार टक्कर में तीन युवकों की मौत हो गई। मृतकों में धपरी निवासी बिट्टू कुमार और सूरज कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीसरे मृतक बरियारपुर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर निवासी 38 वर्षीय पिंटू कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पिंटू अपने पीछे अपनी पत्नी सुलेखा देवी और छह मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं, जिससे उनका परिवार अब गहरे आर्थिक संकट और बेसहारा हालत में आ गया है।
पांच घंटे तक एंबुलेंस के लिए तरसते रहे परिजन
पिंटू कुमार की मौत के बाद उनके परिजन पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को गांव ले जाने के लिए सरकारी शव वाहन का इंतजार कर रहे थे। अत्यंत गरीब परिवार होने के कारण उन्होंने निशुल्क 102 एंबुलेंस सेवा पर संपर्क किया, जहां से उन्हें जल्द ही वाहन भेजने का आश्वासन दिया गया।
सुबह 8 बजे से शुरू हुआ यह इंतजार दोपहर के 1 बजे तक यानी पूरे पांच घंटे तक चलता रहा, लेकिन अस्पताल परिसर में कोई वाहन नहीं पहुंचा। परिजनों ने सदर अस्पताल के प्रबंधक से भी कई बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें यही जवाब मिला कि शव वाहन अभी दूसरे स्थान पर है और लौटते ही भेज दिया जाएगा।
1500 रुपए देकर बुक किया ई-रिक्शा
लंबी प्रतीक्षा के बाद भी जब अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली, तो लाचार परिजनों ने निजी स्तर पर एक ई-रिक्शा का प्रबंध किया। उन्होंने 1500 रुपए में ई-रिक्शा रिजर्व किया। शुरुआत में चालक पुलिस कार्रवाई के डर से शव ले जाने से कतरा रहा था, लेकिन परिजनों द्वारा पोस्टमॉर्टम के कागजात दिखाने और अपनी बेबसी बयां करने के बाद वह तैयार हुआ।
शव को ई-रिक्शा की बीच वाली सीट पर रखकर मोटी रस्सियों से तीन अलग-अलग जगहों पर कसकर बांधा गया, ताकि रास्ते में वह नीचे न गिरे। शव के ठीक बगल में परिजनों को बैठाया गया और एक ही ई-रिक्शा पर शव समेत कुल आठ लोग गांव के लिए रवाना हुए।
जाम और बदले रास्ते के कारण तय करना पड़ा लंबा सफर
सदर अस्पताल से चला यह ई-रिक्शा विभिन्न शहरी मार्गों से होते हुए एनएच-333 तक पहुंचा। हालांकि नौवागढ़ी-बोचाही के पास भीषण जाम मिलने के कारण चालक को अपना रास्ता बदलना पड़ा। इसके चलते कई ग्रामीण और बाईपास मार्गों से गुजरते हुए उन्हें लगभग 30 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ी।
दोपहर में अस्पताल से निकला यह दर्दनाक काफिला करीब तीन घंटे का सफर तय कर दोपहर बाद कल्याणपुर गांव पहुंचा। पूरे रास्तेभर शव ई-रिक्शा में रस्सियों से बंधा हुआ झूलता रहा, जिसे देखकर रास्ते के लोग भी हैरान और मर्माहत नजर आए।
स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मृतक के भाई संजय दास ने स्वास्थ्य विभाग की लचर पर गहरा रोष जताते हुए कहा कि गरीबों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाएं पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं। पांच घंटे तक अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाने के बावजूद कोई मदद नहीं मिली, जिससे परिवार को इस अपमानजनक स्थिति से गुजरना पड़ा।
वहीं, इस मामले पर मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. राजू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। यदि पीड़ित परिवार की ओर से लिखित शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


