अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्री अकाल तख्त साहिब पर आरंभ हुए अखंड पाठ का भोग डाला गया, जिसके बाद जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने संगत को संबोधित किया।

अपने संदेश में जत्थेदार ने जून 1984 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार सिख इतिहास की महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटनाओं में से एक है। उन्होंने सिख समुदाय से गुरु साहिबान की शिक्षाओं पर चलने, एकजुट रहने तथा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने पंजाब से जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

कार्यक्रम के दौरान कुछ समूहों द्वारा खालिस्तान समर्थक नारे लगाए गए और समर्थक पोस्टर लेकर श्री अकाल तख्त के निकट एकत्रित हुए। इसे देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं।

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी को लेकर अमृतसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की कई कंपनियां तैनात की गई हैं। श्री हरिमंदिर साहिब परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक पुलिसकर्मी निगरानी कर रहे हैं। शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और हवाई अड्डे पर भी विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है।

इस बीच, कुछ संगठनों द्वारा अमृतसर बंद का आह्वान किए जाने के कारण प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती है।

क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार?

ऑपरेशन ब्लू स्टार जून 1984 में भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक सैन्य अभियान था। उस समय पंजाब में उग्रवाद बढ़ रहा था और हथियारबंद उग्रवादी अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में मौजूद थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने सैन्य कार्रवाई का निर्णय लिया। 1 जून 1984 को शुरू हुए इस अभियान की मुख्य कार्रवाई 5 और 6 जून की रात को हुई। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और यह घटना आज भी भारतीय इतिहास तथा सिख समुदाय के लिए अत्यंत संवेदनशील विषय बनी हुई है।