दिल्ली हाई कोर्ट ने बैंकाक से भारत लौट रहे एक यात्री से एयरपोर्ट पर जब्त किए गए सोने को वापस करने का आदेश देते हुए कस्टम विभाग को निर्देश दिया है कि निर्धारित शर्तें पूरी होने के बाद सोना तुरंत लौटाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में अपीलीय प्राधिकरण पहले ही राहत दे चुका है और पुनरीक्षण प्राधिकरण ने भी उस निर्णय को बरकरार रखा है।
न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति अजय दिगपॉल की खंडपीठ ने कहा कि 27 जून 2025 के आदेश के तहत याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की जा चुकी थी। इसके बाद 5 मार्च 2026 को पुनरीक्षण प्राधिकरण ने भी उस आदेश की पुष्टि कर दी थी। ऐसे में मामले में आगे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
75 हजार रुपये जुर्माना और कस्टम ड्यूटी का भुगतान जरूरी
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता हरीश कुमार को जब्त किया गया सोना वापस किया जाए। हालांकि, इसके लिए उन्हें 27 जून 2025 के आदेश के अनुसार लागू कस्टम ड्यूटी और 75,000 रुपये का जुर्माना जमा करना होगा।
पीठ ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को अपीलीय कार्यवाही में पहले से प्रदान की गई राहत को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए और अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।
बैंकाक से लौटते समय जब्त किया गया था सोना
मामला बैंकाक से भारत लौट रहे हरीश कुमार के पास मिले सोने के गहनों से जुड़ा है। हरीश कुमार का दावा था कि बरामद सोना उनके निजी उपयोग के गहने थे। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने खरीद से संबंधित इनवाइस और तस्वीरें भी प्रस्तुत की थीं।
इसके बावजूद कस्टम अधिकारियों ने सोने को जब्त करने योग्य मानते हुए बैगेज अलाउंस का लाभ देने से इनकार कर दिया और जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
अपीलीय प्राधिकरण ने दी थी राहत
बाद में कमिश्नर ऑफ कस्टम्स (अपील) ने मूल आदेश में आंशिक संशोधन किया। प्राधिकरण ने जुर्माना बरकरार रखा, लेकिन सोने की पूर्ण जब्ती के आदेश को बदलते हुए हरीश कुमार को जुर्माना और लागू कस्टम ड्यूटी का भुगतान कर सोना वापस लेने की अनुमति दे दी।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कस्टम विभाग को निर्देश दिया कि वह पूर्व में पारित आदेशों का पालन करते हुए याचिकाकर्ता को उसका सोना तत्काल वापस करे।
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