पटना। पूरे बिहार में आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम है और राजधानी पटना स्थित इस्कॉन मंदिर में उत्सव का नजारा देखते ही बन रहा है। मंदिर प्रांगण से लेकर बाहर तक भक्तों का तांता लगा हुआ है। भगवान के अलौकिक दर्शन और विशेष अनुष्ठानों के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा है।

​दुर्लभ योग और नक्षत्रों का संयोग

इस वर्ष जन्माष्टमी पर बेहद दुर्लभ और पवित्र खगोलीय संयोग बन रहे हैं। आज अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का सुंदर मेल है। इसके साथ ही वृष राशि के चंद्रमा की साक्षी, वृष लग्न, मृगशिरा नक्षत्र, हर्षण और वज्र योग का अनूठा युग्म भी बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह योग साधना, पूजा और व्रत के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

​वीआईपी हस्तियों की मौजूदगी और अभिषेक

उत्सव की शुरुआत सुबह से ही विशेष अनुष्ठानों के साथ हो चुकी है। पटना के इस्कॉन टेंपल में 108 चांदी के कलशों से भगवान राधा-कृष्ण का महाअभिषेक किया जा रहा है। मुख्य पूजा की शुरुआत पूर्वाह्न 11 बजे हुई, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मंदिर में शंख से भगवान का अभिषेक किया। इसके अलावा, दोपहर 1 बजे राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन मंदिर पहुंचेंगे और दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस भव्य कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक श्रद्धालुओं और विशेष अतिथियों के लिए अभिषेक की निरंतर व्यवस्था की गई है।

​विदेशी फूलों से सजा ‘फूल बंगला’

मंदिर की सजावट इस बार मुख्य आकर्षण का केंद्र है। बेंगलुरु, पुणे, कोलकाता के साथ-साथ विदेशों से भी विशेष किस्म के फूल मंगाए गए हैं। कुल 8 टन फूलों का उपयोग करके मंदिर को बेहद खूबसूरत ‘फूल बंगला’ के रूप में सजाया गया है, जिसकी अलौकिक छटा देखते ही बनती है। सुबह 4 बजे ही मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे और रात 1:30 बजे तक भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे। पूरे दिन अनवरत कीर्तन और महाप्रसाद की व्यवस्था भी की गई है।

​सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम

भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों की सुरक्षा के लिए 150 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए श्रद्धालुओं की एंट्री बीएसएनएल ऑफिस की ओर से तय की गई है। भीड़ के दबाव को देखते हुए मंदिर परिसर में किसी को भी रुकने की अनुमति नहीं दी जाएगी; भक्त दर्शन करते ही निर्बाध रूप से बाहर निकलेंगे। इसके अलावा, मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे परिसर में प्रवेश से पहले अपने जूते-चप्पलों की सुरक्षा की व्यवस्था स्वयं सुनिश्चित करें।