Rajasthan Coaching News: जयपुर के गोपालपुरा बाईपास स्थित कोचिंग संस्थानों पर जेडीए की कार्रवाई के बाद राजस्थान का कोचिंग सेक्टर मुश्किल में नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में जयपुर विकास प्राधिकरण की प्रवर्तन शाखा कई कोचिंग संस्थानों को सील कर रही है और कुछ को बंद करने के नोटिस दिए गए हैं।

इसके विरोध में राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट एसोसिएशन ने गोपालपुरा बाईपास पर आपात बैठक की। जयपुर के साथ कोटा, सीकर और जोधपुर से आए कोचिंग संचालकों ने कहा कि यदि 5 दिसंबर 2025 से लागू बिल्डिंग बायलॉज में राहत नहीं दी गई तो वे राजस्थान से अपना कारोबार समेटकर दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर होंगे।

पट्टे की शर्त बनी सबसे बड़ी अड़चन

कोचिंग संचालकों के मुताबिक नए नियमों में न्यूनतम 500 वर्ग मीटर भूमि और संस्थागत पट्टे की शर्त रखी गई है। उनका कहना है कि 90 फीसदी से ज्यादा संस्थानों के लिए इन शर्तों को पूरा करना संभव नहीं है।

संचालकों की सबसे बड़ी आपत्ति संस्थागत पट्टे को लेकर है। उनका कहना है कि सरकार ने अब तक किसी भी कोचिंग संस्थान को संस्थागत पट्टा जारी नहीं किया है। ऐसे में इसी शर्त के आधार पर संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बिना चर्चा नियम लागू करने का आरोप

कोचिंग संचालकों ने आरोप लगाया कि नए बिल्डिंग बायलॉज लागू करने से पहले शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों और कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उनका कहना है कि नियम बनाते समय जमीनी स्थिति को ध्यान में नहीं रखा गया।

जयपुर के गोपालपुरा बाईपास और कोटा जैसे प्रमुख शिक्षा केंद्रों में कई पुराने संस्थान ऐसे इलाकों में संचालित हैं, जहां 500 वर्ग मीटर या उससे ज्यादा जमीन उपलब्ध कराना आसान नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेडीए की कार्रवाई

आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और सुरक्षा मानकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जेडीए की प्रवर्तन शाखा कार्रवाई कर रही है। गोपालपुरा बाईपास पर पुलिस बल की मौजूदगी में कोचिंग संस्थानों को सील किया जा रहा है।

कोचिंग संचालकों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार को नियमों के व्यावहारिक पक्ष पर भी विचार करना चाहिए। उनका तर्क है कि जब कोचिंग संचालन के लिए जरूरी संस्थागत पट्टे जारी करने की व्यवस्था ही उपलब्ध नहीं है, तो केवल सीलिंग की कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा।

पूरा स्थानीय कारोबार प्रभावित होने का दावा

संचालकों ने कहा कि राजस्थान का कोचिंग उद्योग सिर्फ शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं है। इससे पीजी, हॉस्टल, मेस, ऑटो और छोटे दुकानदारों समेत बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है।

एसोसिएशन का दावा है कि अगर बड़े पैमाने पर कोचिंग संस्थान दूसरे राज्यों में चले गए तो इसका असर रोजगार और राज्य के राजस्व पर भी पड़ेगा। लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

बैठक में कोचिंग संचालकों ने सरकार और मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। एसोसिएशन ने संस्थागत पट्टे जारी करने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया शुरू करने और सीलिंग कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग रखी है।

संचालकों ने स्पष्ट किया कि यदि पुराने बिल्डिंग बायलॉज बहाल नहीं किए गए या मौजूदा नियमों में राहत नहीं दी गई, तो वे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर जैसे राज्यों में अपना कारोबार ले जाने का विकल्प चुन सकते हैं।

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