शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश एटीएस की जांच में पकड़े गए कथित आतंकी इजहार उल हक की आज रिमांड खत्म हो रही है। ATS भोपाल कोर्ट में पेश करेगी। रिमांड के दौरान इजहार से मॉड्यूल को लेकर पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए है। इजहार और उसके पकड़े गए अन्य साथी पाकिस्तानी टेरर ग्रुप से जुड़े ‘मिशन 2047’ के लिए काम कर रहे थे। इनका मकसद पीएफआई के एजेंडे को वर्ष 2047 तक देश में लागू करना था।

दरअसल, एमपी एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (MP ATS) ने भोपाल के काजी कैंप के पास से मोहम्मद फराज नाम के एजेंट को पकड़ा था। जिसके पास से मदरसों से लेनदेन की जानकारी सामने आई थी। घर से जिहादी दस्तावेज भी मिले थे। फराज मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रहा था। वह विशेष ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने वाला था। देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में अंडर प्रोविजन आफ यूएपीए एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

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पूछताछ में कई नाम आए सामने

फराज से पूछताछ में कथित मास्टरमाइंड और सीनियर एजेंट नईम कुरैशी का नाम सामने आया। जिसे उत्तर प्रदेश के सारंगपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। एटीएस सूत्रों के अनुसार, आरोपी नईम पर देश की महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारियां विदेशी तत्वों तक पहुंचाने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि नईम कुरैशी ने भोपाल निवासी मोहम्मद फराज को कथित तौर पर ट्रेनिंग दी थी और उसे अफगानिस्तान भेजने की योजना में भी शामिल था।

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राजस्थान के अलवर से शाकिर को दबोचा

इसके बाद एमपी एटीएस ने खुफिया इनपुट के आधार पर आरोपी शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से दबोचा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, शाकिर मेव बेहद शातिर है और वह भारत में किसी बड़ी देश विरोधी गतिविधि और हमले की फिराक में था। वह पूरे आतंकी षड्यंत्र का ब्लूप्रिंट और रूपरेखा (प्लानिंग) तैयार करने का मुख्य काम संभालता था। शाकिर मेव, मोहम्मद फराक का ही मुख्य सहयोगी है। ये सभी आरोपी प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के सीधे संपर्क में थे।

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सलाखों के पीछे पहुंचा शाकिर

गिरफ्तारी के बाद एमपी एटीएस की टीम आरोपी शाकिर मेव को लेकर भोपाल पहुंची थी। जहां उसे विशेष न्यायालय (Court) में पेश किया गया। एटीएस ने आतंकी नेटवर्क और उनके भविष्य के प्लान का पर्दाफाश करने के लिए आरोपी की रिमांड मांगी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी शाकिर को 20 जून तक एटीएस की रिमांड पर भेजा था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।

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बिहार के मधुबनी से पकड़ाया था इजहार

वहीं मध्य प्रदेश और बिहार एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मधुबनी से इजहार उल हक को गिरफ्तार किया और भोपाल लाया गया। संयुक्त छापामारी के दौरान अभियुक्त के कब्जे से दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए। इजहार भोपाल से गिरफ्तार किए गए फराज, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकियों के संपर्क में था। इजहार को पाकिस्तान से फंडिग आई थी। पाकिस्तान से आ रही फंडिंग को देश में अपने मॉड्यूल के सदस्यों को पैसे भेजता था।

एमपी एटीएस ने कोर्ट में पेश कर रिमांड ली। रिमांड के दौरान इजहार से मॉड्यूल को लेकर पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए है। इजहार और उसके पकड़े गए अन्य साथी पाकिस्तानी टेरर ग्रुप से जुड़े ‘मिशन 2047’ के लिए काम कर रहे थे। इनका मकसद पीएफआई के एजेंडे को वर्ष 2047 तक देश में लागू करना था। फिलहाल मध्य प्रदेश एटीएस की टीम मॉड्यूल की कड़ियां खंगालने में जुटी हुई है। जल्द ही और भी बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।

ATS की अब तक की कार्रवाई एक नजर में

  • एमपी एटीएस ने 12 जून 2026 को भोपाल के काजी कैंप इलाके से मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्ला को दबोचा। जांच एजेंसी को कथित तौर पर पाकिस्तान आधारित संपर्क और ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी मिली थी।
  • फराज से पूछताछ में देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला कुरैशी का नाम सामने आया था। इसके बाद एटीएस और सहयोगी एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से नईम को गिरफ्तार किया। एटीएस के मुताबिक, नईम और फराज 6 सालों से संपर्क में थे।
  • फिर राजस्थान के अलवर इलाके से मोहम्मद शाकिर मेव को गिरफ्तार किया गया।
  • जांच और पूछताछ में बिहार के मधुबनी निवासी इजहार उल हक का नाम सामने आया था। एमपी एटीएस ने बिहार एटीएस के साथ मिलकर मधुबनी में दबिश दी और 18 जून को पकड़ लिया। गिरफ्तार के बाद MP ATS उसे भोपाल लेकर आई और कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे 22 जून तक रिमांड पर लिया गया था।
  • फिलहाल मोहम्मद फराज, नईम कुरैशी और शाकिर मेव, यह तीनों जेल में हैं।

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