सिरसा: हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर लक्ष्य साफ हो और कोशिश लगातार जारी रहे तो मंजिल देर से ही सही, हासिल जरूर होती है। सिरसा के छोटे से गांव कलुआना के रहने वाले सोनू सुथार की कहानी इसी जिद और जुनून की मिसाल है। परिवार का गुजारा चलाने के लिए कभी उन्हें सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करनी पड़ी तो कभी फैक्ट्री में मजदूरी करनी पड़ी, लेकिन इन जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने सरकारी नौकरी का सपना नहीं छोड़ा। करीब 15 साल के लंबे संघर्ष और कई असफलताओं के बाद आखिरकार सोनू ने HPSC परीक्षा पास कर ली और कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद तक पहुंच गए।

सोनू के लिए यह सफलता किसी एक परीक्षा की तैयारी का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों तक खुद को संभालकर आगे बढ़ते रहने की कहानी है। सिरसा जिले के कलुआना गांव में पले-बढ़े सोनू ने ऐसे दौर भी देखे, जब पढ़ाई और परिवार की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। घर की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए उन्होंने सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम किया और फैक्ट्री में मजदूरी भी की।

नौकरी करते रहे, लेकिन किताबें नहीं छोड़ीं

आम तौर पर आर्थिक परेशानियां किसी व्यक्ति को उसके सपने से दूर कर देती हैं, लेकिन सोनू ने इन्हें अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दिन में काम करने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। परीक्षा दी, नतीजे आए और कई बार उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, लेकिन हर असफलता के बाद उन्होंने तैयारी फिर शुरू कर दी। यह सिलसिला एक-दो साल नहीं, बल्कि करीब 15 वर्षों तक चलता रहा। इस दौरान परिस्थितियां बदलीं, काम बदले और परीक्षाओं के नतीजे भी बदलते रहे, लेकिन सोनू का लक्ष्य नहीं बदला।

आखिर मेहनत ने बदली पूरी जिंदगी

लगातार प्रयासों के बाद वह दिन भी आया जब सोनू ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। इसके साथ ही सरकारी नौकरी का उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हो गया। अब वह हरियाणा के एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

सोनू की कहानी खास इसलिए है क्योंकि उनकी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता सुविधाओं से नहीं, बल्कि संघर्ष से होकर गुजरा। जिस व्यक्ति को कभी परिवार चलाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करनी पड़ी, वही आज विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने वाले शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।

सोनू की कहानी का सबसे बड़ा सबक

सोनू सुथार का सफर बताता है कि असफलता किसी सपने का अंत नहीं होती। कई बार मंजिल तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं, लेकिन अगर मेहनत और खुद पर भरोसा कायम रहे तो संघर्ष का वही दौर एक दिन सफलता की सबसे मजबूत कहानी बन जाता है। सिरसा के छोटे से गांव से शुरू हुआ सोनू का सफर आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक या दूसरी परेशानियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने की सोच रहे हैं।

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