लखनऊ. उत्तर प्रदेश के किसानों पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का बकाया कर्ज देश में सबसे ज्यादा है. लोकसभा में केंद्र सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में यूपी में KCC के तहत कुल बकाया ऋण 1,39,986 करोड़ रुपये रहा. इस मामले में उत्तर प्रदेश ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे बड़े कृषि राज्यों को पीछे छोड़ दिया है.
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पांच साल में 16,900 करोड़ बढ़ा बकाया
आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में यूपी में KCC का बकाया 1,23,076 करोड़ रुपये था. 2022-23 में यह बढ़कर 1,28,123 करोड़ और 2023-24 में 1,38,621 करोड़ रुपये हो गया. 2024-25 में बकाया 1,41,375 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. 2025-26 में मामूली गिरावट के बावजूद यह 1.40 लाख करोड़ के आसपास बना हुआ है.
राजस्थान समेत बड़े राज्यों से आगे यूपी
2025-26 में राजस्थान में KCC बकाया 1,15,769 करोड़ रुपये रहा. मध्य प्रदेश में यह 87,391 करोड़, गुजरात में 81,322 करोड़ और कर्नाटक में 67,398 करोड़ रुपये था. इस तरह यूपी और दूसरे बड़े कृषि राज्यों के बीच बकाया कर्ज का अंतर भी काफी बड़ा है.
खेती की बढ़ती लागत से बढ़ा KCC इस्तेमाल
विशेषज्ञों के मुताबिक बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और कृषि मशीनरी की बढ़ती लागत के कारण किसान KCC के जरिए अधिक संस्थागत ऋण ले रहे हैं. KCC किसानों को अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर फसल ऋण उपलब्ध कराता है. हालांकि लगातार ऊंचा बकाया खेती की लागत और किसानों की आय के बीच असंतुलन की चुनौती को भी दिखाता है.
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KCC की सीमा बढ़कर 5 लाख रुपये
सरकार ने बजट 2025-26 में संशोधित ब्याज अनुदान योजना के तहत KCC ऋण की सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की थी. सरकार का उद्देश्य किसानों को अधिक संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना और साहूकारों जैसे गैर-संस्थागत स्रोतों पर निर्भरता कम करना है. यूपी में KCC बकाया का ऊंचा स्तर अब कृषि ऋण और किसान आय को लेकर नई बहस का आधार बन सकता है.



