लखनऊ. योगी सरकार में मंत्री और सुभसपा प्रमुख ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि ए भाई अखिलेश यादव जी, हर चुनाव में आप और आपके साथी-बारातियों की जनता के हाथों कुटाई और धूलचटाई हो रही है तब भी शर्म नहीं आ रही है क्या? अब तो आपका पूरा चप्पल चोर लोडरों का गैंग एकदम्मे नंगई पर उतारू हो चुका है! दिन-रात खाली बैठकर ट्विटर, एसी-पीसी करके झूठ बोलना और समाज को तोड़ना. ऑस्ट्रेलिया के स्कूल में यही सब सिखाया गया है क्या.. या ये ज्ञान सैफई से मिला है? काम धाम कुछ है नहीं, बइठे-बइठे रट्टू तोता जइसे जाति-जाति करके बस वोटों का सौदा करना है. फिर चाहे समाज की ऐसी-तैसी हो जाए, कोई फर्क नहीं.
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आगे ओपी राजभर ने कहा, कोई घटना हुई नहीं कि आपके इशारे पर आपके बेहया लोडर सब फर्जीगीरी करके कभी सवर्ण-दलित, कभी ठाकुर-यादव, कभी पंडित-पीडीए का झूठ बोलकर समाज को बांटने के लिए गंदी नौटंकी शुरू कर देते हैं. गैर-यादव पिछड़ा और दलित समाज की हर घटना को आपके घटिया लोग ‘जातीय सफाया’ बताकर मगरमच्छ के आंसू बहाते हो, झूठमूठ का विधवा विलाप करते हो. जबकि ज्यादातर मामले निजी रंजिश, प्रेम प्रसंग, जमीन विवाद या खुद उसी जाति के अंदर के झगड़े निकलते हैं. यहां तक कि मछली चोरी के मामले को भी जाति का रंग देना आपके घटिया लोडर गैंग को खूब आता है.
एक जाति से दूसरे को लड़ाने का आपका का खेल पूरा प्रदेश दशकों से देख रहा है. बहुत कर लिये जाति के नाम पर समाज को तोड़ने का नीच काम. आंख खोल के पढ़ ल अखिलेश यादव जी, तू आउर तोहरे लोडरन क महा गंदा खेल. आपके इशारे पर की जा रही ऐसी ही कुछ गंदी राजनीति का पर्दाफाश कर रहा हूं. बस्ती आत्महत्या को दलित अत्याचार बताया गया. सच्चाई ये है कि दोनों पक्ष एक ही दलित बिरादरी के थे। परिवार ने खुद कहा की मामला जातीय नहीं है. बुलंदशहर में मुकेश खटीक हत्याकांड को सवर्ण-दलित बता दिया. मगर आरोपी भी खटीक ही निकला. सुल्तानपुर में सुरेश यादव पर हमला भी दो भाइयों का जमीन का झगड़ा निकला. मगर लोडरों ने इसे ठाकुर-यादव बताकर खूब ढोल पीटा.
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कुशीनगर अभय यादव ट्रैक्टर हत्या, नवनीत कोरी हत्या, रायबरेली जूता चटवाने वाला मामला, मेरठ डीजे विवाद, गार्गी पटेल मारपीट, सबमें यही दो कौड़ी की गंदी राजनीति का फॉर्मूला अपनाया और तो और योगी जी का एडिटेड बयान का वीडियो, अरुण गोविल जी का फर्जी वीडियो, उमा भारती जी का एआई से बनाया ऑडियो, सब आपके नीच लोडरों के गैंग का किया धरा है. संभल दंगे में भी झूठ बोला और इन सब कांड में आपके साथ साथ, माता प्रसाद, आपका मीडिया सेल, आपके दो कौड़ी के समर्थक शिवम यादव, मनोज यादव, मनीष यादव, सूर्या समाजवादी, राजन यादव, अमित यादव, संतोष यादव, ज़िया उर रहमान बर्क, शिवम यादव, प्रज्ज्वल यादव, लुफ्फी, समाजवादी मीडिया सेल, राहुल यादव, आनंद यादव, सुभी यादव, लक्ष्मण यादव, समाजवादी प्रहरी जैसे तमाम गुर्गे तुरंत दलित-पिछड़े उत्पीड़न का जहर समाज में घोलने लग जाते हैं.
अखिलेश यादव जी बंद करो ये दोहरा चरित्र. नहीं तो 2027 में दीदी से भी बुरी गत होगी आपकी. हारना तो तय है ही आपका, पार्टी भी इतने फाड़ होगी कि बटोरते नहीं बनेगा. वोट के लिए समाज को खून से रंग देने का गंदा खेल बंद कर दो भाई. जब आपके दो कौड़ी के लोडर गैर यादव पिछड़ा और दलित का गला घोंटते हैं तो कइसे न मुंह में दही जम जाता है और जब वोट चाहिए तो लगते हो पीडीए-पीडीए के नामपर झुट्ठे छाती पीटने.
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पूरा प्रदेश जान चुका है कि आपके पीडीए का मतलब है ‘पीट देगा अहिर’ और ‘पीट देगा (आपक वाला) अल्पसंख्यक’. सच्चा वाला पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक समाज आपका गिरगिट वाला रंग-रूप पहचान चुका है. एक-एक झूठ, एक-एक फर्जी नैरेटिव, एक-एक एआई वीडियो का इस बार पूरा हिसाब लिया जाएगा. अभी तो आपका और आपके लोडरों का कच्चा-चिट्ठा खोलना शुरू किया हूं. आगे-आगे देखते जाइए होता है क्या..?

