अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त अपने दो दिवसीय चीन दौरे पर हैं। आज गुरुवार को उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। इस दौरान इस दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और खास तौर पर ताइवान मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक में शी जिनपिंग ने ताइवान को लेकर अमेरिका को स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे को सावधानी से नहीं संभाला गया, तो चीन और अमेरिका के संबंध “बेहद खतरनाक स्थिति” में पहुंच सकते हैं। चीन की सरकारी मीडिया ने ये जानकारी दी है। जिनपिंग ने ताइवान को ‘चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे अहम मुद्दा’ बताया है।

शी जिनपिंग ने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि ताइवान मुद्दे को सही तरीके से संभाला जाए, तो चीन और अमेरिका के रिश्ते स्थिर रह सकते हैं। लेकिन अगर इसमें गलत कदम उठाए गए, तो दोनों देशों के बीच टकराव या संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे द्विपक्षीय संबंध बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान स्ट्रेट में शांति बनाए रखना दोनों देशों का साझा हित है और दुनिया की स्थिरता के लिए भी यह जरूरी है।

जिनपिंग ने कहा- व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, जिनपिंग ने कहा कि ताइवान की स्वतंत्रता ‘ताइवान स्ट्रेट में शांति के बिल्कुल उलट’ है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में शांति बनाए रखना चीन और अमेरिका के बीच ‘सबसे बड़ा साझा हित’ है। जिनपिंग ने कहा है कि व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। उन्होंने कहा, “चीन-अमेरिका आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों का आधार पारस्परिक लाभ और विन-विन सहयोग है। दोनों देशों को सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए साथ काम करना होगा।”

ताइवान ने जताया अमेरिका का आभार

ताइवान सरकार की प्रवक्ता मिशेल ली ने बीजिंग में ट्रंप और जिनपिंग की बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से ताइवान के समर्थन को बार-बार दोहराए जाने के लिए हम उनके आभारी हैं।

ट्रंप ने की शी जिनपिंग की खुलकर तारीफ

बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने उन्हें “महान नेता” बताते हुए कहा, “चीन और आपके नेतृत्व में किए गए कार्यों के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है। कई लोगों को मेरा ऐसा कहना पसंद नहीं आता, लेकिन मैं फिर भी कहता हूं कि आप एक महान नेता हैं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी कारोबारी प्रतिनिधिमंडल चीन के प्रति सम्मान जताने और व्यापारिक अवसरों को मजबूत करने के उद्देश्य से उनके साथ आया है।

तय समय से ज्यादा चली बैठक

दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता लगभग दो घंटे तक चली, जो तय कार्यक्रम से करीब एक घंटा अधिक थी। बैठक के बाद शी जिनपिंग ने अमेरिकी उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि चीन अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने बाजार और अधिक खोलेगा। इसके बाद ट्रंप और शी जिनपिंग ने बीजिंग स्थित ऐतिहासिक Temple of Heaven का दौरा भी किया। यह वही ऐतिहासिक परिसर है जहां मिंग और किंग राजवंशों के सम्राट धार्मिक अनुष्ठान किया करते थे।

क्यों अहम है यह मुलाकात?

अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से ताइवान, व्यापार, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसे समय में ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रिश्तों की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। खासकर ताइवान पर चीन की सख्त चेतावनी ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति का सबसे संवेदनशील केंद्र बना रह सकता है।

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