भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं पर विदेश मंत्रालय (MEA) का बयान सामने आया है। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंध हैं और उन्होंने हमेशा कूटनीतियों नियमों के हिसाब से एक-दूसरे का सम्मान किया है। साथ ही मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश काफी समय से एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों देशों ने पिछले साल 13 फरवरी से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू की थी। तब से अब तक कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के लिए संतुलित और फायदेमंद ट्रेड डील तक पहुंचना है।
उन्होंने बताया कि कई मौकों पर हम डील के बेहद करीब थे, लेकिन मीडिया में चल रही रिपोर्ट्स और टिप्पणियां सही नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अभी भी अमेरिका के साथ एक म्यूचुअली बेनिफिशियल ट्रेड डील करने के इच्छुक हैं और इसे जल्द से जल्द पूरा करने की उम्मीद करते हैं। जायसवाल ने कहा कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच साल 2025 में अब तक 8 बार फोन पर बात हो चुकी है जिसमें व्यापक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
भारत लाभकारी व्यापार समझौते के लिए इच्छुक
जायसवाल ने प्रेस ब्रिफिंग में आगे बताया कि कुछ रिपोर्ट्स में भारत और अमेरिके के बीच चल रही व्यापारिक वार्ताओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत की, जिसमें हमारे व्यापक सहयोग के कई पहलुओं पर चर्चा हुई। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत दोनों देशों के लिए लाभकारी और संतुलित व्यापार समझौते के लिए इच्छुक है और आगे इसे पूरा करने की कोशिश जारी रखेगा।
पीएम मोदी-ट्रंप के बीच रिश्ते सम्मानजनक- MEA
जायसवाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हमेशा मित्रवत और सम्मानजनक संबंध रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका पिछले साल फरवरी से दो-पक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। कई दौर की बातचीत हो चुकी है और दोनों पक्ष संतुलित और लाभकारी समझौते के करीब आए हैं। उन्होंने कहा कि 2025 में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप आठ बार फोन पर बातचीत कर चुके हैं, जिसमें दोनों देशों के व्यापक सहयोग और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा हुई। जायसवाल ने जोर देकर कहा कि भारत एक संतुलित और सभी के लिए लाभकारी व्यापार समझौते के लिए इच्छुक है।
रूस से तेल खरीद पर अमेरिका सख्त
बता दें कि विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सेंटेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो-पक्षीय रूस प्रतिबंध बिल को हरी झंडी दे दी है। इस बिल के तहत अमेरिका उन देशों, जैसे भारत, चीन और ब्राजील, पर दबाव डाल सकेगा, जो सस्ते रूस तेल की खरीद से पुतिन की युद्ध मशीन को वित्तीय मदद दे रहे हैं। बिल में रूस से आयातित सभी सामान और सेवाओं पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रावधान है।
जायसवाल ने इस बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नई दिल्ली इस बिल से अवगत है और इसे करीब से देख रही है। उन्होंने कहा कि हम इस प्रस्तावित बिल से अवगत हैं और हालात पर नजर रख रहे हैं। भारत का ऊर्जा निर्णय हमेशा ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार होता है। बता दें कि जायसवाल यहां उस बिल की बात कर रहे थे, जो कि अमेरिका के सदन में पेश किया गया है। इस बिल में उन देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात की गई है जो रूस से तेल खरीदते रहेंगे। इसके बाद भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह अपनी 1.4 अरब जनता के लिए सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा सुनिश्चित करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले लेता है।
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