अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। सरकार एक ओर डिजिटल इंडिया और दिव्यांगों के सशक्तीकरण का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत आज भी प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयां कर रही है। ताजा मामला रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड अंतर्गत चौगाईं गांव का है, जहां एक दिव्यांग अलाउद्दीन अंसारी अपने विशिष्ट दिव्यांंगता पहचान पत्र के लिए सासाराम स्थित सदर अस्पताल का चक्कर काटने को मजबूर हैं।
1990 से दिव्यांग, फिर भी प्रमाण पत्र नहीं
अलाउद्दीन अंसारी वर्ष 1990 से दिव्यांगता का दंश झेल रहे हैं। हालांकि विभाग की ओर से उन्हें पूर्व में बैटरी चालित ट्राई साइकिल मिली है, लेकिन डिजिटल युग में अन्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए उनके पास यूडीआईडी कार्ड नहीं है। उन्होंने बताया कि कार्ड के लिए आवेदन किया है, लेकिन बार-बार उन्हें अगली तारीख दी जा रही है।
व्यवसाय शुरू करने की चाहत
दरअसल अलाउद्दीन अंसारी अपना ऑनलाइन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वे जोमैटो एवं स्कूजी में ऑनलाइन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें विशिष्ट दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जरूरत है। पीड़ित के अनुसार उन्हें कई बार सदर अस्पताल बुलाया गया, लेकिन हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता है।
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