हेमंत शर्मा, इंदौर। डेंटल सर्जन के पद पर भर्ती में आरक्षण लागू करने के तरीके को लेकर मामला अब मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ तक पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संबंधित विभाग को नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ता के लिए एक सीट अंतिम निर्णय तक रिक्त रखने के अंतरिम आदेश दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, डेंटल सर्जन के पदों के लिए 31 दिसंबर 2024 को शासन द्वारा भर्ती निकाली गई थी। इस भर्ती की परीक्षा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण प्रतिशत को नियमों से अलग तरीके से लागू किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि निर्धारित प्रतिशत के अनुरूप आरक्षण लागू नहीं किया गया, जिससे चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके साथ ही EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के तरीके को भी चुनौती दी गई है। याचिका में यह तर्क रखा गया है कि EWS आरक्षण कुल विज्ञापित पदों पर नहीं, बल्कि अनारक्षित वर्ग के पदों में से दिया जाना चाहिए।

कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही यह निर्देश दिया है कि याचिका के अंतिम निराकरण तक एक सीट याचिकाकर्ता के लिए रिक्त रखी जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने पैरवी की
अब इस मामले में विभाग के जवाब और अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला न केवल डेंटल सर्जन भर्ती बल्कि भविष्य की भर्तियों में आरक्षण लागू करने के तरीके को भी प्रभावित कर सकता है।
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