गया। जिले के एपी कॉलोनी में एक निजी स्कूल के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने शिक्षा व्यवस्था और गठबंधन की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी। मांझी ने सरकारी शिक्षकों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए एनडीए के पुराने वादों की भी याद दिलाई।
शिक्षा व्यवस्था
मांझी ने सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल 10 प्रतिशत शिक्षक ही ईमानदारी से काम कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों पर समय की पाबंदी न रखने का आरोप लगाया और कहा कि अधिकतर शिक्षक दोपहर 12 बजे स्कूल आते हैं और 3 बजे निकल जाते हैं। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि सवा लाख रुपये तक वेतन पाने वाले सरकारी शिक्षकों की तुलना में कम वेतन वाले निजी स्कूलों के शिक्षक बेहतर परिणाम दे रहे हैं।
ब्राह्मणवाद और सामाजिक चिंतन
सामाजिक मुद्दों पर बोलते हुए मांझी ने स्पष्ट किया कि ‘ब्राह्मण’ एक जाति है, जबकि ‘ब्राह्मणवाद’ एक संकुचित सोच है। उन्होंने कर्म आधारित सनातन परंपरा का समर्थन करते हुए कहा कि जो ब्रह्म को जाने वही सच्चा ब्राह्मण है। उन्होंने आडंबर और छुआछूत जैसी कुरीतियों के विरोध की बात कही।
राज्यसभा सीट का वादा
राजनीतिक गलियारे में हलचल मचाते हुए मांझी ने कहा कि चुनाव के समय एनडीए ने उनसे दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट का वादा किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नाराज नहीं हैं, लेकिन वादे को निभाना गठबंधन की जिम्मेदारी है। इसे बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ के रूप में देखा जा रहा है।
केजरीवाल और न्यायपालिका पर रुख
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता बताया। अंत में उन्होंने गया की जनता और पीएम मोदी का आभार जताते हुए अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट की।
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