चंडीगढ़/मोगा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 14 मार्च को पंजाब के मोगा में एक विशाल ‘बदलाव रैली’ को संबोधित करने आ रहे हैं। लेकिन उनके दौरे से ठीक पहले राज्य में भारत-अमेरिका ट्रेड डील (व्यापार समझौता) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने के लिए अपनी रणनीति आक्रामक कर दी है।

विधानसभा में ट्रेड डील के खिलाफ प्रस्ताव पारित
पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने हाथ मिलाते हुए इस व्यापार समझौते के विरुद्ध एक प्रस्ताव पारित किया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का मानना है कि यह डील पंजाब के किसानों के हितों के खिलाफ है।

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी नेता प्रताप सिंह बाजवा और सत्ताधारी दल के नेता एक सुर में नजर आए। प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार से कहा कि यदि किसान विरोध स्वरूप हरियाणा बॉर्डर पार करना चाहते हैं, तो सरकार उन पर लाठीचार्ज करने के बजाय उनकी मदद करे।

115 एकड़ में होगी शाह की ‘ऐतिहासिक’ रैली

एक तरफ जहाँ विरोध प्रदर्शनों की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इस रैली को अब तक की सबसे बड़ी रैली बनाने में जुटी है। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने दावा किया है कि यह रैली 115 एकड़ से अधिक क्षेत्र में आयोजित की जा रही है और यह पंजाब के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। बिट्टू के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के प्रति नाराजगी कम हुई है और लोग केंद्रीय योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा गांवों में बैठकें कर भीड़ जुटाने में लगे हैं।

2027 के चुनावों पर असर?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर विपक्षी दल ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील’ के मुद्दे को जनता के बीच गरमाए रखने में सफल रहे, तो इसका सीधा असर 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं पर पड़ सकता है। जहाँ भाजपा इसे विकास और बदलाव की रैली बता रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों की बर्बादी का जरिया करार दे रहा है।