पटना। शहर के मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH), जो बिहार का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, अब बिजली संकट से निपटने के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर होने जा रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है, जिसके तहत अब अस्पताल अधीक्षक को सीधे डीजल खरीदने का अधिकार दे दिया गया है।
फाइल सिस्टम और देरी का हुआ अंत
इससे पहले, PMCH में उच्च क्षमता वाले जेनरेटर होने के बावजूद ईंधन की आपूर्ति के लिए बाहरी एजेंसियों और लंबी कागजी प्रक्रियाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इस देरी के कारण बिजली कटने और जेनरेटर चालू होने के बीच जो समय बीतता था, वह मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था। अब नई व्यवस्था से ‘फाइल कल्चर’ खत्म होगा और बिजली ट्रिपिंग के साथ ही जेनरेटर तुरंत चालू हो सकेंगे।
आधुनिक बुनियादी ढांचा और भारी मांग
PMCH के पुनर्विकास के बाद निर्मित नए हॉस्पिटल टावर में बिजली की खपत कई गुना बढ़ गई है। दर्जनों लिफ्ट, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (OT), आईसीयू (ICU) और सेंट्रल एसी के संचालन के लिए भारी बिजली की आवश्यकता होती है। अस्पताल के पास 1.5 से 1.8 मेगावाट क्षमता के जेनरेटर हैं, जो प्रति घंटे लगभग 400 लीटर डीजल की खपत करते हैं।
मरीजों की सुरक्षा और लिफ्ट संकट का समाधान
हाल के दिनों में बिजली ट्रिपिंग के कारण नई इमारतों की लिफ्ट बीच में ही अटकने की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे मरीज और तीमारदार घंटों फंसे रहते थे। अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा और इलाज की निरंतरता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस फैसले से वेंटिलेटर और आईसीयू जैसी जीवन रक्षक प्रणालियों में एक सेकंड की भी बाधा नहीं आएगी।
स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय
अब डीजल आपूर्ति के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता शून्य हो जाएगी। अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर तत्काल निर्णय लेकर ईंधन सुनिश्चित कर सकेगा, जिससे तकनीकी समस्याओं का समाधान भी तेजी से होगा। यह कदम न केवल अस्पताल की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि हजारों मरीजों को अनिश्चितता के डर से भी मुक्त करेगा।
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