गया/औरंगाबाद। बिहार के सियासी गलियारे में शुक्रवार को उस वक्त खलबली मच गई जब केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भविष्य के नेतृत्व को लेकर एक बड़ी लकीर खींच दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के गयाजी पड़ाव पर मांझी ने दोटूक कहा कि नीतीश के बाद जो भी बिहार की गद्दी संभालेगा, उसे उनके पदचिन्हों पर ही चलना होगा, वरना वह टिक नहीं पाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं अक्सर सरगर्म रहती हैं।

​अतीत का आईना और नीतीश का प्रहार

​मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच से पुराने दौर की याद दिलाते हुए लालू-राबड़ी शासनकाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले बिहार में खौफ का राज था, लोग शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते थे। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर थी। नीतीश ने तंज कसते हुए कहा कि जब सत्ता जाने वाली थी, तो अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिया, लेकिन महिलाओं के कल्याण के लिए कोई ठोस विजन नहीं दिखाया। संबोधन के अंत में नीतीश ने मांझी और सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर गठबंधन की मजबूती का संकेत भी दिया।

​मुंगेर की फजीहत से सतर्क प्रशासन

​गयाजी में इस बार प्रशासन सब्जियों को लेकर खासा मुस्तैद दिखा। दरअसल, कल मुंगेर में हुई घटना ने कृषि विभाग की फजीहत करा दी थी, जहा नीतीश के जाते ही लोगों ने सजावट में रखे आलू, प्याज और नींबू पर धाबा बोल दिया था। झोले भर-भरकर सब्जियां लूटने की उस तस्वीर से सबक लेते हुए, आज गया में फल-सब्जियों के स्टॉल्स की कड़ी घेराबंदी की गई थी। अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि इस बार समृद्धि की रंगोली लूट का शिकार न बने।

​724 योजनाओं की सौगात

​मुख्यमंत्री ने गयाजी में विकास की झड़ी लगा दी। उन्होंने कुल 724 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिसमें पंचायती राज, लघु जल संसाधन और कृषि विभाग की महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। गया में अपना मिशन पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री औरंगाबाद के लिए रवाना हो गए।