सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक पत्नी ने अपने जिंदा पति को कागजों में मरा घोषित कर दिया। इसके बाद उसे झूठे केस में जेल भेज कर उसके नाम पर विधवा पेंशन के पैसे लेकर मौज करती रही। इतना ही नहीं, उससे हर महीने एलुमनी की रकम भी वसूल करती रही। कैद से छूटते ही पीड़ित ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है।
पति का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर लेती रही विधवा पेंशन
विधवा आरोप है कि महिला ने अपने जीवित पति का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और सालों तक विधवा बनकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाती रही। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। हद तो तब पार हो जाती है, जब यही महिला न्यायालय के आदेश के तहत उसी “मृत घोषित” पति से हर महीने 5000 रुपए गुजारा भत्ता भी वसूलती रही।
जेल से बाहर आते ही पति के पैरों तले खिसकी जमीन
यानी एक तरफ सरकार को ठगने का खेल और दूसरी तरफ जीवित व्यक्ति को कागजों में मारकर उससे ही पैसा वसूलने की साजिश रची गई। पीड़ित जब जेल से बाहर आया और उसने इस पूरे मामले की सच्चाई जानी, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। आरोप है कि इस पूरे खेल में पंचायत स्तर के कुछ जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और योजनाओं का दुरुपयोग किया गया।
पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है। सिंगरौली की इस घटना ने न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि रिश्तों की नींव को भी हिला दिया है। यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और प्रशासनिक मिलीभगत का गंभीर आरोप बन चुका है। अब देखना होगा कि इस मार्मिक और गंभीर मामले में प्रशासन कब जागता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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