CBSE Set Up Menstrual Health Centres In Every School: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने बेटियों के लिए बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। स्कूलों में छात्राओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और सुरक्षित माहौल तैयार करने के लिए हर स्कूल में ‘मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर’ बनाने की घोषणा की है। बोर्ड ने सभी स्कूलों को मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर बनाने का निर्देश भी जारी कर दिया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आया है।
अपने आदेश में CBSE ने यह भी साफ किया है कि केवल सुविधाएं देना ही काफी नहीं है। इन विषयों पर छात्रों को जागरूक करना भी बहुत जरूरी है। इसके लिए समय-समय पर हेल्थ सेशन, प्यूबर्टी एजुकेशन और जेंडर सेंसिविट चर्चा करवाई जाएगी। इसका मकसद है कि छात्र-छात्राएं इस विषय को समझें और झिझक को खत्म करें।
CBSE ने शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर स्कूलों के लिए कुछ जरूरी नियम बनाए हैं जिसके तहत छात्राओं को जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यहां पर सैनिटरी नैपकिन आसानी से मिल सकेंगे। इसके अलावा साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाएगा। स्कूलों में मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर भी बनाए जाएंगे और मासिक धर्म से जुड़े कचरे के सही निपटान की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
मासिक धर्म से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित होंगे
स्कूलों को मासिक धर्म से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने होंगे। NCERT और राज्य के SCERT के दिशा-निर्देशों के अनुसार खुलकर चर्चा को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि छात्र बिना झिझक इन विषयों पर बात कर सकें। इस पहल का मकसद स्कूलों में एक सुरक्षित और जागरूक माहौल बनाना है, जहां लड़कियां अपने स्वास्थ्य को लेकर सहज महसूस करें।
स्कूलों को देनी होगी रिपोर्ट
इसके लिए स्कूल ने कितना काम किया है उसे रिपोर्ट भी देना होगा। CBSE ने रिपोर्टिंग सिस्टम भी लागू किया है. सभी स्कूलों को इससे जुड़ी हर महीने तैयारी और सुविधाओं की रिपोर्ट देनी होगी। पहली रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक और दूसरी 30 अप्रैल 2026 तक जमा करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है
बता दें कि 20 जनवरी 2026 को दिए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मासिक धर्म के दौरान छात्राओं को स्वच्छता और सुविधाएं मिलना उनका मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि अगर किसी स्कूल में यह सुविधा नहीं होती है तो, इसका असर लड़कियों की पढ़ाई और आत्मविश्वास पर पडे़गा। इसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर बनाने का निर्देश दिया है, जिससे छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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