भागलपुर/पीरपैंती: बिहार के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीरपैंती से भाजपा के पूर्व विधायक ललन पासवान ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं के भंडारण में बरती जा रही लापरवाही सीधे तौर पर जनता की जान से खिलवाड़ है।
तापमान मानकों की अनदेखी
ललन पासवान ने तकनीकी तथ्यों के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार, दवाओं की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए उन्हें 15°C से 25°C (अधिकतम 30°C) के नियंत्रित तापमान में रखना अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि बिहार के अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों में इस नियम का पालन नहीं हो रहा है, जिससे दवाएं अपनी शक्ति खो रही हैं और मरीजों के लिए बेअसर या हानिकारक साबित हो सकती हैं।
बुनियादी सुविधाओं और मॉनिटरिंग का अभाव
पूर्व विधायक ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि अस्पतालों में न तो दवाओं के भंडारण के लिए उचित एयर-कंडीशनिंग या रेफ्रिजरेशन उपकरण मौजूद हैं और न ही तापमान की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि केंद्रों पर लॉग बुक का रखरखाव भी नदारद है, जिससे यह पता लगाना असंभव हो जाता है कि दवाएं किस स्थिति में और कितने समय तक असुरक्षित माहौल में रहीं। यह प्रशासनिक चूक मरीजों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की मांग
ललन पासवान ने बताया कि इस मुद्दे को उन्होंने साल 2022 में बिहार विधानसभा में भी उठाया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भंडारण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे जनता के हित में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे।
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