US Market Crash : कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी शेयर बाजार को हिलाकर रख दिया है. वॉल स्ट्रीट में आज 27 मार्च को भारी गिरावट देखने को मिली. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और इस बात के संकेतों के बीच कि ईरान से जुड़ा संघर्ष लंबा खिंच सकता है, निवेशकों का भरोसा डगमगा गया. खासकर टेक शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे Nasdaq-100 इंडेक्स आधिकारिक तौर पर “करेक्शन” जोन में चला गया.

शुरुआती कारोबार में गिरावट

न्यूयॉर्क में सुबह करीब 9:45 बजे, S&P 500 इंडेक्स 0.6% नीचे था. यह इंडेक्स अब लगातार पाँचवें हफ़्ते गिरावट के साथ बंद होने की राह पर है, जो 2022 के बाद से इसकी सबसे लंबी गिरावट की लकीर है. इस बीच, Nasdaq-100 इंडेक्स 0.7% गिर गया. इस गिरावट के साथ, इंडेक्स अब अपने अक्टूबर के उच्चतम स्तर से 10% से ज़्यादा नीचे कारोबार कर रहा है. इस तरह की हलचल को आम तौर पर “करेक्शन” कहा जाता है.

तेल की कीमतों में उछाल, मुख्य वजह

अमेरिकी शेयर बाज़ार पर सबसे ज्यादा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी की वजह से है. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड वायदा $111 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंताएं और बढ़ गईं. जानकारों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतें शेयर बाजारों पर सीधे तौर पर नीचे की ओर दबाव डालती हैं, क्योंकि वे बढ़ती महंगाई के जोखिम को बढ़ाती हैं और कंपनियों के परिचालन खर्च में इजाफा करती हैं.

ईरान-इजरायल तनाव से अनिश्चितता बढ़ी

मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है. दोनों देशों के बीच मिसाइलों का आदान-प्रदान जारी है, जबकि अमेरिका भी इस संकट में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहे हैं, फिर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैनिक तैनात करने पर भी विचार कर रहा है.

बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से शेयर बाजार पर दबाव

अमेरिका का 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.46% हो गया है, जो निवेशकों के लिए चिंता का एक और कारण बन गया है. तेल की कीमतों में उछाल के कारण बढ़ती महंगाई का डर फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल बना सकता है. जानकारों का मानना ​​है कि ज्यादा यील्ड निवेशकों को सुरक्षित निवेश के विकल्पों की ओर आकर्षित करती है, जिससे इक्विटी बाज़ार में निवेश कम हो जाता है.