विकास कुमार/सहरसा। जिले में पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश और भीषण आंधी-तूफान ने खेती-किसानी की कमर तोड़ कर रख दी है। मक्का और गेहूं की तैयार फसलें खेतों में बिछ गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस तबाही के बाद प्रशासन की सुस्ती से नाराज किसानों का धैर्य जवाब दे गया और वे अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए।
महागठबंधन के बैनर तले जोरदार धरना
फसल क्षति के मुआवजे की मांग को लेकर सहरसा स्टेडियम के बाहरी परिसर में महागठबंधन द्वारा एकदिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में जिले भर से आए सैकड़ों किसान, राजनीतिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेता शामिल हुए। प्रदर्शन की अध्यक्षता राजद जिलाध्यक्ष प्रो. मो. ताहिर ने की, जबकि नेतृत्व महिषी विधायक डॉ. गौतम कृष्ण ने संभाली।
सरकार और प्रशासन को सीधी चेतावनी
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में आए मोनथा तूफान के समय भी किसानों को उचित न्याय नहीं मिला और अब हालिया आपदा के बाद भी प्रशासन केवल खानापूर्ति कर रहा है। विधायक डॉ. गौतम कृष्ण ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, किसानों के हक के साथ कोई समझौता नहीं होगा। यदि किसी अधिकारी ने मुआवजे की प्रक्रिया में धांधली की या किसानों को छला, तो उनके कार्यालयों में ताला जड़ दिया जाएगा।
शत-प्रतिशत मुआवजे की मांग
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत पूरी तरह मिट्टी में मिल चुकी है, इसलिए उन्हें आंशिक नहीं बल्कि शत-प्रतिशत मुआवजा मिलना चाहिए। भारी नारेबाजी के बीच प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे चुप नहीं बैठेंगे। फिलहाल, पूरे जिले की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई और सर्वे रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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