प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धर्म नगरी उज्जैन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहराता जा रहा है। परिषद के दो धड़ों के बीच जारी खींचतान अब ‘शत्रु नाश’ की दुआओं तक जा पहुंची है। निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने एक बार फिर कड़े तेवर दिखाते हुए विरोधियों पर सीधा निशाना साधा है। 

नगर पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मीडिया से बातचीत में महाराज ने कहा, ‘हमने मां भगवती से प्रार्थना की है कि हमारे शत्रुओं का नाश हो। जो लोग आगामी कुंभ मेलों की गरिमा और व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करना चाहते हैं, उनका पतन निश्चित है।’ हालांकि उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके इस ‘तंज’ का इशारा साफ तौर पर महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव और खुद को अध्यक्ष बताने वाले दूसरे गुट की ओर माना जा रहा है। 

रवींद्र पुरी महाराज ने दो अध्यक्षों के विवाद पर चुटकी लेते हुए कहा कि पद न मिलने की हताशा में कुछ लोगों की मानसिकता कमजोर हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़ा परिषद का असली नेतृत्व प्रयागराज कुंभ के समय से ही तय है और नासिक कुंभ के बाद ही विधिवत चुनाव प्रक्रिया संपन्न होगी। संतों के बीच छिड़ी इस जुबानी जंग ने 2028 के उज्जैन सिंहस्थ से पहले अखाड़ा राजनीति में भारी गर्माहट पैदा कर दी है।

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