ईरान के साथ चल रहे युद्ध को शुक्रवार को एक महीना पूरा होने के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, USS त्रिपोली पर सवार करीब 3,500 मरीन और नाविक क्षेत्र में पहुंच गए हैं. युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली F-35 स्टील्थ फाइटर जेट और ओस्प्रे जैसे एडवांस एयरक्राफ्ट ऑपरेट करने में सक्षम है. इसको पहले जापान में तैनात किया गया था, लेकिन करीब दो हफ्ते पहले इसे मिडिल ईस्ट भेजा गया. इसके अलावा USS Boxer और सैन डिएगो से अन्य नौसैनिक यूनिट्स को भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है. 

अमेरिका का आधुनिक युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली अपने निर्धारित ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है, जिसमें लगभग 2500 मरीन सैनिक सवार हैं.

USS ट्रिपोली और 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट आमतौर पर जापान में तैनात रहती है. रिपोर्ट के अनुसार, ये यूनिट ताइवान के पास अभ्यास कर रही थी, लेकिन बाद में इसे मध्य पूर्व की ओर भेज दिया गया.

मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है. जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने क्षेत्र में 3500 से ज्यादा सैनिक तैनात किए गए हैं और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि आधुनिक युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली अपने निर्धारित ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है, जिसमें लगभग 2500 मरीन सैनिक सवार हैं.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया. इस हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. 

फिलहाल कूटनीतिक प्रयास भी नाकाम होते दिख रहे हैं. अमेरिका की ओर से दूत स्टीव विटकॉफ ने सीजफायर का प्रस्ताव दिया था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक और समुद्री रास्ते खोलने की बात थी. लेकिन ईरान ने इसे खारिज कर दिया और बदले में मुआवजे और अपनी संप्रभुता की मान्यता की मांग रखी.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका बिना जमीनी सैनिक उतारे अपने लक्ष्य हासिल करना चाहता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बदलते हालात के लिए तैयार रहना होगा. वहीं अब हालात और जटिल हो गए जब यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस संघर्ष में एंट्री कर ली.

जंग का असर अब वैश्विक व्यापार और हवाई मार्गों पर भी दिखने लगा है. कई देशों को वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद हो चुका है. हूती समूह ने इजरायल की ओर मिसाइल दागने का दावा किया है. इससे बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट और स्वेज नहर जैसे अहम समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

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