पटना। बिहार की न्यायपालिका और वकीलों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पटना में इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (बिहार चैप्टर) ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त किया है। संगठन का आरोप है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पहचान रखने वाले वकीलों के प्रति सरकार पूरी तरह उदासीन है। केदार भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर त्वरित विचार नहीं हुआ, तो राज्य भर के वकील सड़कों पर उतरेंगे।

​आर्थिक तंगी और उपेक्षा का शिकार वकील

​प्रदेश अध्यक्ष योगेश चंद्र वर्मा ने चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि बिहार के लगभग 80 प्रतिशत वकीलों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। विशेष रूप से इस पेशे में कदम रखने वाले युवाओं को शुरुआती वर्षों में भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। पर्याप्त सरकारी सहयोग के अभाव में वकीलों का यह वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, जिसका सीधा असर न्याय व्यवस्था की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

​न्यायपालिका में शून्यता और लंबित मामले

​संगठन ने बिहार की न्यायपालिका को संकट काल में बताया। अदालतों में न्यायाधीशों के हजारों पद रिक्त होने के कारण लाखों मुकदमे लंबित हैं। वर्मा ने मांग की कि निचली अदालतों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक सभी खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए, ताकि आम जनता को तारीख पर तारीख के बजाय समय पर न्याय मिल सके।

​सात सूत्रीय मांगें: स्टाइपेंड से लेकर आरक्षण तक

​एसोसिएशन ने सरकार के सामने सात प्रमुख मांगें रखी हैं, जो वकीलों के अस्तित्व से जुड़ी हैं:

  • ​स्टाइपेंड का क्रियान्वयन: नए वकीलों के लिए घोषित 5000 रुपये मासिक स्टाइपेंड को तत्काल धरातल पर उतारा जाए।
  • ​रिक्त पदों की पूर्ति: न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए जजों की नियुक्तियां तुरंत की जाएं।
  • ​कल्याण निधि में वृद्धि: अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि को बढ़ाकर न्यूनतम 25 लाख रुपये किया जाए।
  • ​पेंशन योजना: झारखंड की तर्ज पर बिहार के वरिष्ठ वकीलों को 14 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
  • ​स्वास्थ्य सुरक्षा: वकीलों और उनके परिजनों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाया जाए।
  • ​महिला आरक्षण: न्यायपालिका के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित हो।
  • ​सामाजिक न्याय: सरकारी पैनल में दलित, पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस वकीलों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

​आर-पार की लड़ाई का ऐलान

​महासचिव राम जीवन प्रसाद सिंह और उदय प्रताप सिंह की उपस्थिति में संगठन ने चेतावनी दी कि यह केवल मांग नहीं, बल्कि वकीलों के सम्मान की लड़ाई है। यदि सरकार ने सकारात्मक पहल नहीं की, तो राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।