पटना। वैवाहिक वेबसाइट के जरिए सुनहरे भविष्य का सपना संजोकर बंधी एक शादी, चंद महीनों में ही कड़वाहट और कानूनी लड़ाई की भेंट चढ़ गई। मामला बिहार राज्य महिला आयोग तक पहुंचा है, जहां एक पीड़िता ने अपने पति, सास और ससुर पर अमानवीय व्यवहार, मारपीट और दहेज के लिए मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।
दहेज की मांग और खौफनाक यातनाएं
पीड़िता के अनुसार, निकाह के बाद उसे ससुराल के बजाय किराए के मकान में रखा गया। शादी के मात्र दो महीने बाद ही 25 लाख की मांग शुरू हो गई। विरोध करने पर पीड़िता को शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया जाने लगा। महिला का आरोप है कि पति और सास उसके हाथ-पांव पकड़ लेते थे और ससुर उसे जूतों से पीटते थे। हद तो तब हो गई जब पति ने उसे धमकी देते हुए कहा कि उसका भाई भी उसे रोहिणी आचार्य के भाई की तरह घर से निकाल देगा।
भ्रूण जांच का दबाव और बेटी का जन्म
दिसंबर 2024 में जब महिला गर्भवती हुई, तो ससुराल पक्ष ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। जेठ की दो बेटियां होने के कारण परिवार पर वारिस (बेटे) का दबाव था, जिसके लिए महिला पर अवैध भ्रूण जांच कराने का दबाव डाला गया। मांग न मानने पर उसे आर्थिक रूप से भी तंग किया गया। अंततः मजबूर होकर महिला अपने मायके चली गई, जहां सितंबर 2025 में उसने एक बेटी को जन्म दिया।
ससुराल में नो-एंट्री और तलाक का नोटिस
नवंबर 2025 में जब महिला अपनी नवजात बेटी के साथ ससुराल लौटी, तो उसे घर में घुसने नहीं दिया गया। पुलिस (112 की टीम) के हस्तक्षेप के बाद ससुराल वालों ने हफ्ते भर में बुलाने का झूठा आश्वासन दिया, लेकिन इसके बदले उसे पति की ओर से तलाक का लीगल नोटिस भेज दिया गया।
पति का पक्ष: प्रॉपर्टी और व्यवहार का विवाद
दूसरी ओर, पति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उसका दावा है कि पत्नी ने शादी के बाद उनके परिवार को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। पति के अनुसार, वह अपनी पत्नी को सम्मान देने के लिए गुजरात भी ले गया था, लेकिन वह संपत्ति में हिस्सा लेकर अलग रहना चाहती है। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने उसे शादी की सालगिरह के दिन झूठे केस में 22 घंटे थाने में बंद रखवाया।
आयोग की पहल: प्राथमिकता बच्ची का भविष्य
बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. अप्सरा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए हुई शादी में एडजस्टमेंट की कमी का मामला है। फिलहाल महिला बेरोजगार है और बच्ची की परवरिश मायके वाले कर रहे हैं। आयोग का प्राथमिक लक्ष्य बच्ची का भविष्य सुरक्षित करना और संभव हो तो दोनों के बीच समझौता कराकर घर बसाना है।
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