कुंदन कुमार/ पटना। बिहार के मोतिहारी में जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों ने एक बार फिर राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हृदयविदारक घटना में अब तक 4 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 6 लोगों की आंखों की रोशनी स्थायी रूप से चली गई है। कई अन्य पीड़ित अभी भी अस्पतालों में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस त्रासदी ने प्रभावित परिवारों में कोहराम मचा दिया है।

​आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए एनडीए सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक बिहार में 1300 से अधिक लोग जहरीली शराब की भेंट चढ़ चुके हैं। तेजस्वी ने दावा किया कि हकीकत में यह संख्या सरकारी फाइलों से कहीं अधिक भयावह है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल मौतें नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की विफलता का प्रमाण हैं।

​भ्रष्ट तंत्र और माफिया का गठजोड़

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में शराबबंदी कानून का मूल उद्देश्य पूरी तरह भटक चुका है। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा-जदयू गठबंधन पर प्रहार करते हुए कहा कि यह कानून अब सत्ताधारी नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों और शराब माफियाओं के लिए अवैध कमाई का जरिया बन गया है। उनके अनुसार, शराबबंदी अब एक कमाऊ पूत में तब्दील हो चुकी है, जहां रसूखदार लोग आम जनता की जान की कीमत पर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।

​होम डिलीवरी और पुलिस की भूमिका

नीतीश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी ने कहा कि आज बिहार में शराब की होम डिलीवरी धड़ल्ले से हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है। सरकार की नाक के नीचे जहरीली शराब का काला कारोबार फल-फूल रहा है, जिसकी भारी कीमत बिहार के गरीब और मासूम लोग अपनी जान गंवाकर चुका रहे हैं।