जब अलार्म नहीं था तो कैसे उठते थे लोग? जानिए
जब अलार्म नहीं था तो कैसे उठते थे लोग? जानिए
स्मार्टफोन और डिजिटल घड़ी से पहले लोग सुबह जागने के लिए नॉकर अपर्स और कैंडल क्लॉक जैसे अनोखे तरीकों का इस्तेमाल करते थे.
स्मार्टफोन और डिजिटल घड़ी से पहले लोग सुबह जागने के लिए नॉकर अपर्स और कैंडल क्लॉक जैसे अनोखे तरीकों का इस्तेमाल करते थे.
आइए बाकी और अन्य तरीकों के बारे में जानते हैं.
आइए बाकी और अन्य तरीकों के बारे में जानते हैं.
औद्योगिक क्रांति के समय, खासकर 1800 से 1900 के बीच ब्रिटेन में 'नॉकर अपर्स' नाम का एक अनोखा पेशा बेहद मशहूर था.
औद्योगिक क्रांति के समय, खासकर 1800 से 1900 के बीच ब्रिटेन में 'नॉकर अपर्स' नाम का एक अनोखा पेशा बेहद मशहूर था.
उस समय कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के पास न तो घड़ियां थीं और न ही अलार्म खरीदने के पैसे.
उस समय कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के पास न तो घड़ियां थीं और न ही अलार्म खरीदने के पैसे.
ऐसे में ये इंसानी अलार्म पूरी रात जागते थे और सुबह 3 बजे से ही गलियों में निकल जाते थे.
ऐसे में ये इंसानी अलार्म पूरी रात जागते थे और सुबह 3 बजे से ही गलियों में निकल जाते थे.
उनके पास एक लंबी छड़ी होती थी जिससे वे लोगों की खिड़कियों पर टक-टक करते थे.
उनके पास एक लंबी छड़ी होती थी जिससे वे लोगों की खिड़कियों पर टक-टक करते थे.
वे तब तक वहां से नहीं हटते थे जब तक घर के अंदर से कोई जागने का जवाब न दे दे.
वे तब तक वहां से नहीं हटते थे जब तक घर के अंदर से कोई जागने का जवाब न दे दे.
लंदन की मैरी स्मिथ जैसी महिलाएं मटर की गोलियों (pea shooter) से खिड़कियों पर निशाना लगाकर लोगों को जगाती थीं.
लंदन की मैरी स्मिथ जैसी महिलाएं मटर की गोलियों (pea shooter) से खिड़कियों पर निशाना लगाकर लोगों को जगाती थीं.
सैकड़ों साल पहले चीन में लोग समय के पाबंद होने के लिए कैंडल क्लॉक का इस्तेमाल करते थे.
सैकड़ों साल पहले चीन में लोग समय के पाबंद होने के लिए कैंडल क्लॉक का इस्तेमाल करते थे.
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