अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. मुगलसराय का एकौनी गांव एलपीजी संकट के बीच आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन गया है. पिछले पांच वर्षों से यहां गोबर गैस को एलपीजी के विकल्प के रूप में सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है. गांव के लगभग 125 घरों में पाइपलाइन के जरिए बायोगैस की आपूर्ति की जा रही है, जिससे ग्रामीणों को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ता.
इस पहल की शुरुआत गांव के युवा उद्यमी चंद्रप्रकाश सिंह ने की थी. उन्होंने 150 से 200 गायों के साथ एक गौशाला स्थापित की. दूध उत्पादन के साथ-साथ, उन्होंने गोबर का उपयोग बायोगैस प्लांट में करना शुरू किया, जो अब पूरे गांव की रसोई को ऊर्जा प्रदान कर रहा है.
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लगभग 3 किलोमीटर के दायरे में फैले नेटवर्क के माध्यम से घर-घर तक गैस कनेक्शन पहुंचाए गए हैं. सुबह और शाम, हर समय लगभग 3-3 घंटे गैस की आपूर्ति की जाती है, जो भोजन पकाने के लिए पर्याप्त है. इससे ग्रामीणों को न तो एलपीजी सिलेंडर बुक करने की चिंता रहती है और न ही लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है. गांव की महिलाओं, जिनमें मालती सिंह, शीला सिंह और सविता सिंह शामिल हैं, का कहना है कि यह व्यवस्था सस्ती, सुरक्षित और सुविधाजनक है. कम खर्च में पूरे महीने रसोई गैस उपलब्ध हो जाती है, जिससे घरेलू बजट पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.
चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि भविष्य में इस परियोजना का विस्तार करने की योजना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस सुविधा से जोड़ा जा सके. एकौनी गांव की यह पहल न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन रही है.
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