कानपुर. अवैध कफ सिरप मामले के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया है. आदेश के बाद भी आरोपी गिरफ्तार या सरेंडर नहीं होता तो उसकी संपत्तियां कुर्क की जाएगी. वहीं, कानपुर में कफ सिरप तस्करी गिरोह के 25 हजार के इनामिया CA शिवम अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस कमिश्नरेट प्रशासन दुबई में छिपे सरगना का प्रत्यर्पण कराने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस पहले से जारी करवाने की कोशिशें में भी जुटा हुआ है. शुभम के खिलाफ गैर जमानती वारंट, कुर्की पूर्व की उद्घोषणा, अदालत के आदेश पर उपस्थित न होकर अवहेलना करने का केस पहले से दर्ज है. इनमें चार्जशीट लगने के बाद शनिवार को कोर्ट से शुभम जायसवाल को भगोड़ा घोषित कर दिया.

बता दें कि 15 नवंबर 2025 को औषधि निरीक्षक जुनाब अली ने वाराणसी के प्रह्लादघाट मोहल्ला कायस्थान निवासी शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला प्रसाद समेत 28 लोगों के खिलाफ कफ सिरप के गैर चिकित्सकीय उपयोग के लिए NDPS एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. विवेचना के दौरान नाम साने आने पर पुलिस शुभम के पिता भोलानाथ जायसवाल समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. दुबई में छिपे शुभम जायसवाल को पुलिस अब तक नहीं पकड़ पाई है.

इसे भी पढ़ें : नशे की खेप खाकः चिमनी भट्टी में जलाकर 528 किलो गांजे को पुलिस ने किया नष्ट, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल ने इस अवैध कारोबार से 800 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है. हर शीशी पर 500 रुपये का मुनाफा लिया गया है. आरोपी ने 2.24 करोड़ शीशीयां बांग्लादेश भेजी थी. एक शीशी की खरीद 100 से 120 रुपये थी. आरोपियों ने अवैध बिक्री से कुल 1,100 करोड़ की आमदनी की.

दवा कंपनी को 300 करोड़ का भुगतान

बीते जनवरी महीने में इस केस की छानबीन के दौरान पता चला था कि आरोपी शुभम जायसवाल ने दवा कंपनी को 300 करोड़ का भुगतान किया था. कंपनी से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ जांच पड़ताल चल रही है. शुभम ने अपनी 800 करोड़ रुपये की कमाई में अपने साथियों को भी हिस्सेदार बनाया था. यह अवैध कारोबार एक सिंडीकेट के जरिए चलाया जा रहा था. खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में इस पूरे अवैध धंधे का खुलासा हुआ था. आरोपी के पिता ने रांची में मेसर्स शैली ट्रेडर्स नामक दवा फर्म खोली थी, जिससे ये अवैध कारोबार चलाया गया.

इसे भी पढ़ें : बेमौसम बारिश से फसलों के नुकसान पर योगी का सख्त निर्देश, डीएम को फील्ड पर जाकर आकलन करने का आदेश, तत्काल रिपोर्ट देने और 24 घंटे में मुआवजा भुगतान पर जोर

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने झारखंड के अधिकारियों की मदद से इस मामले का पर्दाफाश किया था. उसके बाद शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. इसके बाद केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और बीएसएफ ने भी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश भेजी जा रही सिरप की खेप को सीमा पर पकड़ लिया, जिससे इस सिंडीकेट के अन्य सदस्य भी सामने आए. ईडी और अन्य एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं.