Pakistan Demand Three Nobel Peace Prize: आतंकवादियों का पालक-पोषक और भारत में आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान को भी शांति का नोबल पुरस्कार चाहिए। वो भी एक नहीं तीन-तीन नोबल पुरस्कार। दरअसल अमेरिका-ईरान सीजफायर (US-Iran ceasefire) में मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) और सेना प्रमुख आसिम मुनीर (Asim Munir ) को शांति का नोबल पुरस्कार देने की मांग भिखमंगे पाकिस्तानी कर रहे हैं। हद तो उस समय हो गई, जब विदेश मंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) को नोबेल पुरस्कार देने की डिमांड की गई। बकायदा इसके लिए पाकिस्तान की पंजाब असेंबली में नोबेल शांति पुरस्कार देने का प्रस्ताव पेश कर दिया गया है।

8 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान से सीजफायर का ऐलान किया था। ट्रम्प ने बताया था कि उन्होंने यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अपील के बाद लिया था। ईरान ने भी इसकी पुष्टि की थी।

पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा में पेश प्रस्ताव में ईरान जंग में सीजफायर का क्रेडिट प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उपप्रधानमंत्री इशाक डार को दिया गया।

यह प्रस्ताव पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के चीफ व्हिप राणा मोहम्मद अरशद द्वारा सदन में रखा। प्रस्ताव के अनुसार, इन नेताओं ने अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इन नेताओं के प्रयासों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त किया है। प्रस्ताव में विशेष रूप से इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का उल्लेख किया गया है, जो वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन गया था. असेंबली का मानना है कि पाकिस्तान के इन तीनों शीर्ष नेताओं ने इस अंतरराष्ट्रीय संकट को टालने और युद्धविराम  कराने में ‘प्रमुख भूमिका’ निभाई है।

पाकिस्तानी नेताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे जाने की मांग

प्रस्ताव में कहा गया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रम्प से बातचीत कर 2 हफ्ते का समय मांगा, ताकि कूटनीतिक प्रयासों को मौका मिल सके। अमेरिकी पक्ष ने इसे स्वीकार किया। उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने अमेरिका और अन्य पक्षों से बातचीत लगातार जारी रखी और दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने में अहम भूमिका निभाई। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता था और अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल सकता था। ऐसे में पाकिस्तान के नेतृत्व की कूटनीतिक पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाना चाहिए और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान ने सीजफायर के लिए क्या किया?

अमेरिका और ईरान की जंग में पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें कई हफ्तों से जारी थीं। कभी बातचीत की मेज पर और कभी परदे के पीछे…

  • जंग शुरू होने के 3 हफ्ते बाद 22 मार्च को पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रम्प और पीएम शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की। अगले ही दिन ट्रम्प ने ईरान के गैस प्लांट्स पर 5 दिन के लिए हमले रोक दिए।
  • 29 मार्च को इस्लामाबाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई। इसकी अपडेट लेकर इशाक डार बीजिंग पहुंचे। उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी को ब्रीफ किया।
  • 5 अप्रैल को खबरें आईं कि अमेरिका, ईरान और एक मध्यस्थ देश तीनों मिलकर 45 दिन के सीजफायर प्लान पर चर्चा कर रहे हैं। इसी दिन ट्रम्प ने ईरान को लेकर गालियों भरा एक पोस्ट भी लिखा। ट्रम्प ने 48 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट खोलने और डील करने की धमकी दी।
  • 6-7 अप्रैल की पूरी रात शरीफ और मुनीर ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से कई बार फोन पर बात की।
  • 7 अप्रैल की शाम 6 बजे ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘आज रात ईरान की पूरी सभ्यता को तबाह कर देंगे, जो फिर कभी वापस नहीं आ सकेगी।
  • इस पूरे वाकये में चीन की वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई। तीन ईरानी अधिकारियों ने बताया कि चीन ने आखिरी वक्त पर ईरानी लीडरशिप से बात की और सीजफायर करने का दबाव बनाया। दरअसल, चीन पहले ही कह चुका था कि अगर जंग खिंचती रही तो वो ईरान से ज्यादा दिन तक तेल नहीं खरीद पाएगा।
  • 8 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान किया।

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