प्रयागराज. कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट जज पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना त्याग पत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया है. केंद्र सरकार ने बीते साल जस्टिस यशवंत को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध के बाद भी उनकी नियुक्ति की गई थी. इतना ही नहीं उनके खिलाफ महाभियोग भी लाया गया था.
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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की थी. CJI संजीव खन्ना की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनको फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का फैसला किया था. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने भारी मात्रा में कैश बरामद होने पर चिंता जाहिर की थी. कॉलेजियम के सदस्यों का मानना ये भी था कि अगर जस्टिस यशवंत वर्मा का सिर्फ तबादला किया गया तो न्यायपालिका की छवि पर बुरा असर पड़ेगा. कॉलेजियम के सदस्यों का कहना ये भी था कि जस्टिस यशवंत वर्मा से इस्तीफा मांगना चाहिए.
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दरअसल, जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगी थी. जिसके बाद उनके परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को बुलाया था. आग बुझाने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के बंगले में पुलिस और दमकल कर्मियों को भारी मात्रा में कैश मिला था. जिस वक्त आग लगी तब जस्टिस वर्मा शहर में नहीं थे.
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