CBSE Board 3rd Language Rule: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानि CBSE ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव करने शुरू कर दिए हैं. इसी के तहत CBSE ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) 2023 की सिफारिशों को सख्ती से लागू करने का काम शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में 9 अप्रैल को जारी आधिकारिक सर्कुलर में बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि बहुभाषी शिक्षा (Multilingual Learning) के तहत अब कक्षा 6 से तीन भाषाओं का फॉर्मूला (R1, R2, R3) अनिवार्य होगा.

9वीं और 10वीं कक्षा के लिए भी बड़ा बदलाव

इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्र कक्षा 9 और 10 में केवल उन्हीं भाषाओं को चुन सकेंगे, जिन्हें स्कूल ने कक्षा 6 में ‘तीसरी भाषा’ के तौर पर पढ़ाया होगा. यानी भविष्य के विकल्प अब कक्षा 6 की पसंद पर निर्भर करेंगे. सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय इस आदेश के पालन की कड़ी निगरानी करेंगे. बोर्ड का उद्देश्य छात्रों के बीच भाषाई दक्षता और सांस्कृतिक समझ को बढ़ाना है.

बोर्ड ने कहा- किताबों जब आएँगी तब आएंगी, उससे पहले शुरू हो पढ़ाई

बोर्ड ने देश के स्कूलों को साफ़ निर्देश दिया है कि वे किताबों के आने का इंतजार न करें. अपने आदेश में बोर्ड ने कहा है कि, जब तक किताबें नहीं आतीं, तब तक सभी स्कूल अपने क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों-सामग्री या अन्य किताबों के जरिए तीसरी भाषा की कक्षाएं तुरंत शुरू करें. इसके साथ ही, स्कूलों को अपनी चुनी हुई तीसरी भाषा की जानकारी ‘OASIS’ पोर्टल पर भी अपडेट करनी होगी.

भाषा का चयन बहुत सोच-समझकर करना होगा – सर्कुलर

सीबीएसई ने स्कूलों को साफ़ कहा है कि जो थर्ड लैंगुएज कक्षा 6 में शुरू की जाएगी, वही भाषा आगे चलकर कक्षा 9वीं और 10वीं में ऑप्शनल सब्जेक्ट के तौर पर लेनी होगी. यानि कि स्कूलों को अपनी भाषा का चयन बहुत सोच-समझकर करना होगा और इसकी जानकारी तुरंत ‘OASIS’ पोर्टल पर अपडेट करनी होगी ताकि बाद में दिक्कत न हो. बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Offices) इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे और सात दिनों के भीतर अनुपालन सुनिश्चित न करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जा सकता है.

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