अंबाला। हरियाणा की अनाज मंडियों में पोर्टल में आई तकनीकी खराबी के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस समस्या की पुष्टि मंडी सचिव और मार्केट कमेटी के चेयरमैन ने भी की है। हालांकि, अब पोर्टल सुचारू रूप से काम करने लगा है और मंडियों में फसल लेकर पहुंच रहे किसान व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त कर रहे हैं।
खरीद प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति
हरियाणा में एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद प्रारंभ हो चुकी है। शुरुआत में मौसम के ठंडे मिजाज के कारण आवक धीमी थी, लेकिन अब मंडियों में गेहूं की आवक चरम पर पहुंच गई है। बीते दिन पूरे प्रदेश में पोर्टल में तकनीकी खामी आ गई थी, जिससे गेट पास कटने में बाधा आई। अंबाला कैंट अनाज मंडी की बात करें तो यहां किसानों की सुविधा के लिए पहले ऑफलाइन गेट पास जारी किए गए, जिन्हें बाद में ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया। इस वैकल्पिक व्यवस्था के कारण किसानों को अन्य मंडियों की तुलना में कम परेशानी हुई।
अंबाला कैंट मंडी के आंकड़े
मंडी प्रशासन के अनुसार, अब तक अंबाला कैंट अनाज मंडी में 1,155 गेट पास काटे जा चुके हैं। मंडी में अब तक कुल 75 हजार क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई है, जिसमें से 43,900 क्विंटल की खरीद की जा चुकी है और 24,000 क्विंटल गेहूं का उठान भी संपन्न हो चुका है।
मंडी प्रशासन का पक्ष
मार्केट कमेटी के चेयरमैन और सचिव ने बताया कि पोर्टल में आया तकनीकी फॉल्ट अब मुख्यालय के माध्यम से दुरुस्त कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था या नियम के लागू होने पर शुरुआती दौर में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं, जिन्हें फीडबैक के आधार पर हल किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को भुगतान और उठान की प्रक्रिया में कोई असुविधा न हो।
किसानों की भविष्य को लेकर चिंता
मंडी पहुंचे किसानों ने वर्तमान व्यवस्था की सराहना तो की, लेकिन आगामी धान के सीजन को लेकर चिंता भी जताई। किसानों का तर्क है कि गेहूं के मुकाबले धान की आवक दो से तीन गुना अधिक होती है। यदि धान की फसल के समय पोर्टल में ऐसी तकनीकी खामी आती है, तो स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि धान सीजन से पूर्व पोर्टल की क्षमता और तकनीकी सुदृढ़ता को सुनिश्चित किया जाए।

