परवेज खान, यमुनानगर। गेहूं का सीजन अपने चरम पर है, लेकिन मंडियों में अव्यवस्था ने किसानों और आढ़तियों की कमर तोड़ दी है। छछरौली अनाज मंडी में खरीद प्रक्रिया के बाद उठान न होने के कारण गेहूं की बोरियों के ऊंचे-ऊंचे ढेर लग गए हैं। सरकार द्वारा नियुक्त तीन एजेंसियांहैफेड, वेयरहाउस और एफसीआई इस अव्यवस्था के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, जिसका सीधा खामियाजा अन्नदाता को भुगतना पड़ रहा है।

छछरौली अनाज मंडी, प्रशासनिक लापरवाही की झेल रही मार
यमुनानगर की छछरौली अनाज मंडी इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही की मार झेल रही है। मंडी परिसर में तिल धरने की जगह नहीं बची है, क्योंकि खरीदी गई फसल का समय पर उठान नहीं हो पा रहा है। खुले आसमान के नीचे पड़ी गेहूं की बोरियों पर मौसम की मार का खतरा मंडरा रहा है। आढ़तियों का कहना है कि मंडी में जगह न होने के कारण नई आवक को संभालने में भारी दिक्कत आ रही है।
समन्वय की कमी , एक दूसरे पर फोड़ रही ठिकरा
हैरानी की बात यह है कि खरीद का जिम्मा संभाल रही तीनों एजेंसियां समन्वय की कमी के कारण एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रही हैं। किसान अपनी मेहनत की फसल को असुरक्षित देख चिंतित हैं। इस मामले में एफसीआई के छछरौली इंस्पेक्टर सुखचैन का कहना है कि वे सप्ताह में दो दिन खरीद और उसके बाद लिफ्टिंग की प्रक्रिया अपनाते हैं। उनके अनुसार 6 अप्रैल तक का उठान कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन 13 अप्रैल की लिफ्टिंग अभी लंबित है।
अव्यवस्था ने सरकारी दावों की खोली पोल
मंडियों में पसरी इस अव्यवस्था ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल की कमी का दंड किसान और आढ़ती कब तक भुगतेंगे? प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत हस्तक्षेप कर उठान कार्य में तेजी लाए ताकि किसानों को राहत मिल सके और उनकी फसल खराब होने से बच जाए।

