चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के हजारों कच्चे कर्मचारियों और गेस्ट टीचर्स के भविष्य पर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अशोक कुमार बनाम हरियाणा राज्य मामले में कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सरकार को वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें अनिश्चितकाल तक अनुबंध या एडहॉक पर नहीं रखा जा सकता।
10 साल की सेवा पर नियमितीकरण का हक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि जिन कर्मचारियों ने 10 वर्ष या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूरी कर ली है और नियुक्ति के समय वे सभी अनिवार्य योग्यताएं रखते थे, वे पक्का होने के हकदार हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि यदि विभागों में नियमित पद रिक्त नहीं हैं, तो इन कर्मचारियों के समायोजन के लिए विशेष पद (सुपरन्यूमरेरी पोस्ट) सृजित किए जाएं। हालांकि, कोर्ट का यह निर्णय मिला-जुला रहा क्योंकि वर्ष 2014 की दो नीतियों को सुरक्षित रखा गया है, जबकि एक अन्य नीति को स्पष्टता के अभाव में रद्द कर दिया गया है।
समान काम-समान वेतन के सिद्धांत पर मुहर
अदालत ने समान काम-समान वेतन के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन कर्मचारियों को उनके समकक्ष नियमित कर्मियों के न्यूनतम वेतनमान के बराबर भुगतान किया जाए। इस आदेश से हरियाणा के गेस्ट टीचर्स और विभिन्न विभागों में कार्यरत अनुबंध कर्मियों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक टल गया है।
समय सीमा में लागू होगा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2011 और उसके बाद की नीतियों के तहत आने वाले पात्र कर्मचारियों की सूची तत्काल तैयार की जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को एक निश्चित समय सीमा के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने और इस आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद प्रदेश के सरकारी महकमों में वर्षों से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों में उत्साह की लहर है, वहीं विभाग अब पात्र कर्मियों का डेटा जुटाने की तैयारी में लग गए हैं।

