कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। अब किसान अपने खेतों में खड़े पेड़ों को आसानी से और बेहतर कीमत पर बेच सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने ई-नीलामी पोर्टल लॉन्च किया है। सरकार का उद्देश्य किसानों को बिचौलियों से बचाकर उनकी उपज का सही मूल्य दिलाना है।
क्या है ई-नीलामी पोर्टल
वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं एचएफडीसी (Haryana Forest Development Corporation – हरियाणा वन विकास निगम) के अध्यक्ष सुधीर राजपाल की मौजूदगी में हुई मंडल की 146वीं बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध निदेशक के.सी. मीणा ने इस योजना का प्रस्ताव रखा। योजना के तहत जो किसान इस पोर्टल का उपयोग करना चाहते हैं, उन्हें संबंधित जनरल मैनेजर को आवेदन देना होगा। इसके बाद कॉर्पोरेशन के फील्ड अधिकारी खेत में खड़े पेड़ों का आकलन और मार्किंग करेंगे तथा उनके वॉल्यूम के आधार पर आरक्षित मूल्य तय किया जाएगा। हालांकि, किसान चाहें तो अपना आरक्षित मूल्य स्वयं भी निर्धारित कर सकते हैं। इसके बाद पेड़ों का विवरण ई-नीलामी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
कौन से पेड़ शामिल
किसान अपने खेतों में खड़े एग्रोफॉरेस्ट्री (Agroforestry – कृषि वानिकी) प्रजातियों जैसे यूकेलिप्टस और पॉपलर आदि के पेड़ों को इस पोर्टल के माध्यम से बेच सकेंगे। नीलामी में प्राप्त बोली की जानकारी किसान को दी जाएगी और यदि किसान उस मूल्य से सहमत होगा, तभी आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। किसान पर किसी प्रकार की बाध्यता नहीं होगी।
मामूली सेवा शुल्क
अधिकारियों के अनुसार, यदि किसान ई-नीलामी पोर्टल के माध्यम से पेड़ों की कटाई करवाता है, तो एचएफडीसी कुल नीलामी मूल्य का केवल 5 प्रतिशत सेवा शुल्क लेगा। शेष राशि सीधे किसान के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी जाएगी। यह योजना संस्थानों के लिए भी लागू होगी, लेकिन उनसे 10 प्रतिशत सेवा शुल्क लिया जाएगा।
सरकार का मकसद
सुधीर राजपाल ने बताया कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य दिलाना है। ई-नीलामी प्रणाली से किसानों और संस्थानों को अपने खड़े पेड़ों की बिक्री पर बेहतर कीमत मिलने की संभावना है और बिचौलियों से मुक्ति भी मिलेगी।
तैयारी पूरी
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि एचएफडीसी ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए आवश्यक नियम तैयार कर लिए हैं। किसानों को जल्द ही इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इस योजना से किसानों की आय में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।

