भारत सरकार इस वक्त ग्रेट निकोबार द्वीप को एक आधुनिक समुद्री और आर्थिक केंद्र बनाने की बड़ी योजना पर काम कर रही है. लेकिन पिछले दिनों इस परियोजना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल खड़े कर दिए थे. उन्होंने इस परियोजना को SCAM बताते हुए सरकार पर जर, जंगल जमीन का दोहन करने का आरोप लगाया. उन्होंने द्वीप का दौरा कर जंगलों की कटाई और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का मुद्दा भी उठाया था. अब सरकार ने उनके सवालों के जवाब में विस्तृत जानकारी जारी की है और कहा है कि यह परियोजना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

क्या है ग्रेट निकोबार परियोजना ?

ग्रेट निकोबार परियोजना का मुख्य उद्देश्य निकोबार द्वीप समूह के सबसे बड़े द्वीप को एक रणनीतिक समुद्री हब के रूप में विकसित करना है. यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी. सरकार का कहना है कि यह परियोजना विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों जैसे कोलंबो और सिंगापुर पर भारत की निर्भरता को कम करेगी.

बता दें कि, यह द्वीप पूर्व-पश्चिम अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग से केवल 40 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है, जो इसे रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण बनाता है. परियोजना के तहत यहां एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, एक आधुनिक हवाई अड्डा, पावर प्लांट और एक नई टाउनशिप बनाई जाएगी.

परियोजना के मुख्य हिस्से

ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह: यहां 14.2 मिलियन टीईयू क्षमता वाला विश्व स्तरीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनेगा. इस बंदरगाह की प्राकृतिक गहराई 20 मीटर से ज्यादा है, जो बड़े जहाजों को आसानी से आने-जाने की सुविधा देगी. इससे भारतीय कार्गो को विदेशी बंदरगाहों पर भेजने की जरूरत कम होगी. भारत को राजस्व की बचत होगी.

अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: द्वीप पर एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जाएगा, जो शुरू में 1 मिलियन यात्रियों की क्षमता वाला होगा. भविष्य में 10 मिलियन तक पहुंच सकता है. इससे पर्यटन बढ़ेगा और द्वीप की कनेक्टिविटी बेहतर होगी.

पावर प्लांट: 450 मेगावाट क्षमता का गैस और सौर ऊर्जा आधारित हाइब्रिड पावर प्लांट बनेगा. इससे द्वीप को सस्ती और विश्वसनीय बिजली मिल सकेगी.

टाउनशिप: बंदरगाह और हवाई अड्डे से जुड़े कर्मचारियों और व्यवसायियों के लिए एक सुनियोजित टाउनशिप विकसित की जाएगी.

पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि परियोजना के लिए पूरे द्वीप के केवल 1.82 प्रतिशत वन क्षेत्र का ही उपयोग किया जाएगा. कुल 7.11 लाख पेड़ काटे जा सकते हैं, लेकिन यह काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा.

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