Delhi Electoral Roll Revision: देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 47 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कटने की नौबत आ गई है। दरअसल दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision) यानी एसआईआर (SIR) के तहत 24 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची से 47 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी की 70 में से 47 विधानसभा सीटों पर 30 से 40 प्रतिशत तक मतदाताओं के नाम इस सूची से बाहर हो जाएंगे।

30 जून से 17 अगस्त तक चले घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख से अधिक (लगभग हर तीसरा मतदाता) सत्यापन फॉर्म जमा न करने या अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक और डुप्लीकेट के रूप में चिह्नित होने के कारण बाहर हो रहे हैं।

दिल्ली के पॉश इलाकों से लेकर ग्रामीण और अनधिकृत कालोनियों में वोटरों के नाम कट सकता है। ग्रेटर कैलाश, मालवीय नगर, नई दिल्ली और आरके पुरम जैसे हाई-प्रोफाइल और पॉश इलाकों में नाम हटने का प्रतिशत 35 से 45 तक है। वहीं, दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कई क्षेत्रों मसलन तुगलकाबाद में लगभग 48 प्रतिशत ड्राफ्ट मतदाता सूची में जगह नहीं बना पाएंगे। दूसरी ओर, अनधिकृत कालोनियों, झुग्गी बस्तियों और पुनर्वास बस्तियों वाले क्षेत्रों में डिजिटल फॉर्म जमा करने की दर बेहतर रही है। इसके चलते किराड़ी, सुल्तानपुर माजरा, करवल नगर, मंगोलपुरी और सीलमपुर जैसे क्षेत्रों में सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं का प्रतिशत तुलनात्मक रूप से कम है।

अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर भी मिला-जुला असर

अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर भी मिला-जुला असर देखने को मिला है। ओखला विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 45 प्रतिशत मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हुए हैं, जिससे वे सूची से बाहर रहेंगे। इसके उलट सीलमपुर, मटिया महल, बाबरपुर और मुस्तफाबाद जैसे अन्य अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन बेहतर होने से कम 23 से 28 प्रतिशत नाम ही बाहर हुए हैं।केवल रोहिणी और शकूरबस्ती ही ऐसे दो क्षेत्र हैं जहां डिजिटल फॉर्म जमा करने का आंकड़ा 80 प्रतिशत के पार पहुंचा है।

दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मिलेगा मौका

सीईओ कार्यालय के मुताबिक जिन मतदाताओं के नाम अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी के कारण सूची से कटे हैं, उनके पास अपनी आपत्ति और दावे दर्ज कराने का पूरा अवसर रहेगा। 24 अगस्त से 23 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। चुनाव अधिकारियों द्वारा 24 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच इन सभी आवेदनों का निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद प्रक्रिया पूरी करते हुए 27 अक्टूबर को दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

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