दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीशू आजाद (Nishu Azad) के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। स्वतंत्र पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में अब दिल्ली में प्रदर्शन शुरू हो गया है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व दक्ष चौधरी (Daksh Choudhary) अपने समर्थकों के साथ कर रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल लोग स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज किए गए मामले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस ने स्वतंत्र के खिलाफ कार्रवाई की है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।

क्या है प्रदर्शनकारियों की मांगें

दिल्ली में हिंदूवादी संगठन की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन में आरोप लगाया जा रहा है कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज किया गया मामला दबाव में दर्ज किया गया है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि स्वतंत्र के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट, धारा 307 और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों को हटाया जाए। उनका दावा है कि पुलिस की जांच में इन धाराओं को लगाए जाने के आधार सामने नहीं आए थे।

प्रदर्शन में शामिल स्वतंत्र भारद्वाज के एक समर्थक ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वतंत्र को वीडियो और पॉडकास्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है, जबकि नाबालिग छात्रा के पिता का भी एक वीडियो सामने आया है। समर्थक ने दावा किया कि इस वीडियो में छात्रा के पिता कथित तौर पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि अगर पुलिस दो मिनट तक नहीं पहुंचती तो वे स्वतंत्र भारद्वाज के साथ क्या करते। समर्थक ने आगे कहा कि संविधान व्यक्ति को अपने बचाव का अधिकार देता है। उसका दावा था कि जब 15-20 लोगों की भीड़ स्वतंत्र भारद्वाज पर हमला करने के लिए आ रही थी और इसी दौरान बचाव की कोशिश में किसी को चोट लग गई, तो उस आधार पर एससी/एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट जैसी धाराएं लगाना उचित नहीं है।

समर्थकों ने उठाया जाति का मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थकों ने मामले को जातिगत नजरिए से भी जोड़ते हुए सवाल उठाए। एक समर्थक ने कहा कि एससी/एसटी और ओबीसी समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है, लेकिन सामान्य वर्ग के लोगों की बात नहीं की जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्वतंत्र भारद्वाज की गलती सिर्फ इतनी है कि वह ब्राह्मण समाज से आते हैं। समर्थक ने कहा कि स्वतंत्र के मामले में ब्राह्मण समाज के नेताओं की ओर से भी समर्थन सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने इस मामले की तुलना छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों से करते हुए सवाल उठाया कि अगर अन्य मामलों में FIR वापस लेने की मांग की गई थी, तो स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामला वापस क्यों नहीं लिया गया।

प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि सौरभ दास ने सरकार से अपील की थी कि NEET प्रदर्शन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस ली जाएं और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी। इसी आधार पर उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर भी सरकार से कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की।

UAPA को लेकर भी सरकार से सवाल

प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थकों ने UAPA को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। एक समर्थक ने कहा कि देश में सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान देने, देश विरोधी नारे लगाने और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। समर्थक ने सवाल किया कि ऐसे मामलों में UAPA के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की मांग दोहराई। एक समर्थक ने कहा कि स्वतंत्र पर लगाए गए केस और उनके खिलाफ लगाए गए कथित झूठे आरोप वापस लिए जाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ब्राह्मण समाज सड़क पर उतरकर विरोध करेगा। समर्थक ने यह भी आरोप लगाया कि ब्राह्मण समाज को दबाने के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज दबने वाला नहीं है और स्वतंत्र भारद्वाज की आवाज पूरे देश में उठाई जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी सरकार ब्राह्मण समाज के खिलाफ कोई कानून लाएगी, उसके खिलाफ विरोध किया जाएगा।

दूसरे समर्थक ने पूछा- लोकतंत्र है या भीड़तंत्र?

प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के एक अन्य समर्थक ने पुलिस कार्रवाई और मामले में लगाई गई धाराओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यह लोकतंत्र है या भीड़तंत्र? समर्थक का आरोप था कि 400-500 लोग एक जगह इकट्ठा होकर पुलिस पर दबाव बनाते हैं और इसके बाद सिर्फ किसी व्यक्ति के सरनेम या पहचान के आधार पर उसके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग की जाती है।

समर्थक ने सवाल उठाया कि अगर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग थी, तो प्रदर्शन के दौरान ही यह मांग क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन खत्म हुए काफी समय बीत चुका है और मारपीट व विवाद की घटना को भी करीब दो महीने हो चुके हैं। ऐसे में अब अचानक एससी/एसटी एक्ट का मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को बाद में पता चला कि संबंधित व्यक्ति का सरनेम भारद्वाज है और इसके बाद ही एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग तेज हुई। समर्थक ने इसे लेकर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

क्या था पूरा मामला

पूरा विवाद 23 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान सामने आया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीशू आजाद के पिता के साथ स्वतंत्र भारद्वाज ने मारपीट की थी। घटना के बाद पुलिस ने उसी दिन देर शाम मामले में एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि, नीशू आजाद ने आरोप लगाया था कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की। मामला उस समय फिर चर्चा में आ गया, जब हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर नीशू आजाद के पिता के साथ मारपीट करने की बात स्वीकार की और दावा किया कि इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। पॉडकास्ट का वीडियो सामने आने और वायरल होने के बाद मामले ने दोबारा तूल पकड़ लिया। इसके बाद विपक्ष के कई नेताओं ने नीशू आजाद का समर्थन किया और स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ नए सिरे से कार्रवाई की मांग की। विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।

क्या बोला था स्वतंत्र भारद्वाज

एक पॉडकास्ट के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज ने जंतर-मंतर पर हुई मारपीट की घटना को लेकर अपनी बात रखी थी। बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि उन्होंने नीशू आजाद के पिता के साथ मारपीट की थी। उन्होंने घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा था कि हमले के बाद नीशू के पिता घायल हो गए थे। पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने यह भी दावा किया था कि घटना के बावजूद उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि उनके कई नेताओं से संबंध हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने लोकसभा सांसद चिराग पासवान और दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा का नाम भी लिया था। भारद्वाज ने दोनों नेताओं को अपना बड़ा भाई बताते हुए उनसे अपने संबंधों का जिक्र किया था।

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