कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। गणेश चतुर्थी के साथ ही ग्वालियर में भी गणेश उत्सव की धूम शुरू हो गई है। बाजारों में भगवान गणेश की एक से बढ़कर एक आकर्षक प्रतिमाएं सज गई हैं, लेकिन इस बार लोगों का रुझान मिट्टी से बनी पर्यावरण हितैषी गणेश प्रतिमाओं की ओर ज्यादा देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं के साथ मूर्तिकार गणेश भक्तों को एक अनोखा संदेश भी दे रहे है, “गणपति की भक्ति के साथ पर्यावरण और हरियाली का संकल्प”

गणेश उत्सव के लिए बाजारों में अलग अलग आकार, रूप और रंगों की गणेश प्रतिमाएं मौजूद हैं। कोई बप्पा की मनमोहक छवि को पसंद कर रहा है तो कोई छोटी और सुंदर प्रतिमा अपने घर ले जा रहा है। लेकिन मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं इस बार लोगों को खास तौर पर आकर्षित कर रही हैं।

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दरअसल, मूर्तिकार मिट्टी के गणेश के साथ फ्लावर पॉट और बीज भी उपलब्ध करा रहे हैं। इसका उद्देश्य है कि गणेश उत्सव समाप्त होने के बाद लोग प्राकृतिक जल स्रोतों में प्रतिमा विसर्जन करने के बजाय घर पर ही फ्लावर पॉट में गणेश प्रतिमा का विसर्जन करें। मिट्टी से बनी प्रतिमा पानी में घुलने के बाद उसी मिट्टी को फ्लावर पॉट में रखा जा सकता है और उसमें दिए गए बीज डालकर एक नया पौधा तैयार किया जा सकता है। यानी गणपति बप्पा की विदाई के साथ घर में हरियाली का एक नया संदेश भी जन्म लेगा।

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लोग भी इस पहल को पसंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे आस्था और परंपरा भी बनी रहेगी, साथ ही नदियों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में भी मदद मिलेगी। कुल मिलाकर इस गणेश उत्सव में मिट्टी के गणपति सिर्फ पूजा और आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरियाली की नई सोच का संदेश भी बन रहे हैं। “बप्पा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक, आस्था, प्रकृति भी और एक पौधे के रूप में नई जिंदगी की शुरुआत भी देखने मिलेगी।

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