दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत ढहने की दर्दनाक घटना के बाद प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई तेज हो गई है। मलबे में लोगों की तलाश के बीच अब मामले में कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी ताबड़तोड़ कदम उठाए जा रहे हैं। एक ओर जहां मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है, वहीं आरोपी मकान मालिक पर शिकंजा कसते हुए पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी किया है। सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई है।
इसके साथ ही दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल भवनों का सुरक्षा एवं संरचनात्मक ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी PG और हॉस्टल इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ करेगी। यह जनहित याचिका अनिकेत कुमार गुप्ता ने दायर की है। याचिका के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना में कम से कम छह लोगों की मौत हुई है। इस मामले में PG आवास चलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है।
भवन मालिक की तलाश में पुलिस की 10 टीमें गठित
हादसे के बाद से फरार चल रहे मुख्य आरोपी और भवन मालिक हरिराम के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी किया है, ताकि वह देश छोड़कर फरार न हो सके। पुलिस ने आरोपी के पासपोर्ट की कॉपी भी हासिल कर ली है। FIR दर्ज होने के बाद उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। हरिराम को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 अलग-अलग टीमें गठित की हैं। इन टीमों में जिले की स्थानीय पुलिस और स्पेशल स्टाफ के अलावा विभिन्न ऑपरेशन यूनिट के पुलिसकर्मी शामिल हैं। सभी टीमों की निगरानी जिले के एडिशनल DCP रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। पुलिस आरोपी की तलाश में दिल्ली और हरियाणा में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्तर पर टीमें लगातार काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का सख्त एक्शन, अवैध पांचवीं मंजिल वाले भवन होंगे सील
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज सुबह एक बार फिर सत्य निकेतन स्थित दुर्घटनास्थल का दौरा किया और मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि दिल्ली में अवैध रूप से बनाई गई पांचवीं मंजिल वाले भवनों को तत्काल सील किया जाए। इसके साथ ही सत्य निकेतन के आसपास मौजूद सभी PG और बहुमंजिला इमारतों की सघन जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित भवन के खिलाफ तत्काल सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हादसे के लिए जो भी MCD अधिकारी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शाम 5 बजे LG ने बुलाई आपात बैठक
सत्य निकेतन हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) तरनजीत सिंह संधू ने आज शाम 5 बजे उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, MCD, DDA और अन्य संबंधित एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और अवैध PG के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। प्रशासन की ओर से हादसे के बाद भवनों की सुरक्षा जांच और नियमों के पालन को लेकर सख्ती बढ़ाई जा रही है।
याचिकाकर्ता की क्या मांग?
याचिका में मांग की गई है कि सत्य निकेतन की इमारत में हुए निर्माण या मरम्मत कार्य की कानूनी वैधता और भवन की संरचनात्मक मजबूती की जांच की जाए। यह भी पता लगाया जाए कि निर्माण स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के अनुसार हुआ था या नहीं। इसके अलावा, इमारत की मजबूती से जुड़े प्रमाणपत्र उपलब्ध थे या नहीं, फायर सेफ्टी नियमों का पालन किया गया था या नहीं और संबंधित सरकारी अधिकारियों ने भवन की पर्याप्त जांच की थी या नहीं, इन सभी पहलुओं की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के साथ-साथ इमारत ढहने के कारणों की विस्तृत जांच की मांग की है। इसमें मकान मालिकों, बिल्डरों, ठेकेदारों, आर्किटेक्ट, स्ट्रक्चरल इंजीनियरों और मरम्मत या निर्माण कार्य में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की गई है। साथ ही, भवन निर्माण नियमों की निगरानी और उनका पालन सुनिश्चित करने वाले सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
दिल्ली के दूसरे छात्रावास क्षेत्रों में भी जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने सत्य निकेतन में मौजूद सभी PG, हॉस्टल और छात्रों के रहने की जगहों की तत्काल स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा, दिल्ली के अन्य ऐसे प्रमुख इलाकों में भी सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती की जांच कराने की मांग की गई है, जहां बड़ी संख्या में छात्र हॉस्टल या PG में रहते हैं।
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