MP Assembly Monsoon Session: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक 2026 सर्वसम्मति से पारित हो गया। प्रदेश में तेजी से हो रहे शहरीकरण और औद्योगीकरण के बीच आगजनी व आपातकालीन हादसों पर अंकुश लगाने के लिए यह विधेयक लाया गया है। बिल के पारित होने से पहले सदन में जमकर चर्चा हुई। एक ओर जहां जबलपुर से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ‘फायरमैन’ के अनोखे लुक में विधानसभा पहुंचे, वहीं विपक्ष ने फायर स्टेशनों और कर्मचारियों की कमी को लेकर सरकार को घेरा।
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अग्निशमन एवं आपातकालीन विधेयक की महत्वपूर्ण बातें:
कड़े नियम और टैक्स का प्रस्ताव: 15 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों, बड़े स्कूलों, हॉस्टलों, अस्पतालों, मॉल और कमर्शियल कॉम्पलेक्स में फायर सेफ्टी के सख्त मानक लागू होंगे। नियमों का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी और फायर सेफ्टी टैक्स लगाने का भी प्रस्ताव है।
सख्त जवाबदेही: भविष्य में जहां भी आगजनी की घटना होगी वहां यह देखा जाएगा कि इमारत में सेफ्टी मानक थे या नहीं। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अफसरों को मजिस्ट्रियल पावर: आपदा और आगजनी के वक्त तुरंत राहत पहुंचाने के लिए फायर सेफ्टी अधिकारियों को मजिस्ट्रियल पावर दिए जाएंगे, जिससे वे जरूरत पड़ने पर रास्ते या बाधक को तुरंत तोड़ सकेंगे।
विशेष ट्रेंट फोर्स: फायर सेफ्टी के लिए एक फोर्स और तकनीकी अधिकारियों की टीम बनेगी। यह 24 घंटे और सातो दिन काम करने वाली संस्था होगी।
अत्याधुनिक मशीनें व एनओसी की समय सीमा: मध्य प्रदेश में आधुनिक अग्निशमन उपकरण लाए जाएंगे। फायर एनओसी और सर्टिफिकेट जारी करने के लिए तय समय सीमा निर्धारित की जाएगी।
थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन अनिवार्य: हर साल इमारतों का थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रदेशस्तरीय मैपिंग: पूरे मध्य प्रदेश की मैपिंग की जा रही है जिससे यह तय किया जा सके की नए फायर स्टेशन कहां-कहां खोले जाने की जरूरत है।
अपील मंच का गठन: यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या शिकायत होती है तो उसके लिए एक निष्पक्ष अपील मंच भी बनाया जाएगा।
बाढ़ व अन्य आपदाओं में भी तैनाती: यह फोर्स सिर्फ आग ही नहीं बल्कि बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में भी रेस्क्यू ऑपरेशन का काम करेगी।
6 महीने में पूरी तरह होगा लागू: नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार इस पूरे एक्ट को धरातल पर लागू करने में करीब 6 महीने का समय लगेगा।
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‘फायरमैन’ बन पहुंचे बन पहुंचे भापजा MLA, कांग्रेस ने उठाए सवाल
सदन में पेश हुए इस बिल पर विपक्ष ने खामियां गिनाने और उस पर सुधार को लेकर सरकार से सवाल किए तो वहीं सरकार के मंत्रियों ने बिल के समर्थन में बात रखते हुए इस संसोधन की उपलब्धियों को गिनाया:
‘देश का सर्वश्रेष्ठ एक्ट है MP का विधेयक’- कैलाश विजयवर्गीय
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह विधेयक जनहानि और धनहानि दोनों को रोकेगा। आग बुझे के अलग-अलग तरीके होते हैं। जिन्हें इस एक्ट में शामिल किया गया है। कई राज्यों के एक्ट का अध्ययन कर इसे बनाया गया है, यह देश का सर्वश्रेष्ठ एक्ट है। अधिकारियों की जिम्मेदारी और पारदर्शिता तय की गई है।
नगरीय ही नही, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मील का पत्थर- अभिलाष पांडे
जबलपुर से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने कहा कि मध्य प्रदेश में बहुप्रतीक्षित फायर सेफ्टी एक्ट को लाने के लिए सरकार का धन्यवाद। मैने कई बार विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। यह एक्ट नगरीय ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।
‘कागजों पर लागू न रहे, धरातल पर हो सख्ती’- राम किशोर दोगने
कांग्रेस विधायक राम किशोर दोगने ने कहा कि फायर सेफ्टी नियम पहले से लागू हैं लेकिन उनका पालन नहीं होता। आग लगने से कई परिवार तबाह हो जाते हैं इसलिए सरकार को इस नए नियम को पूरी सख्ती से लागू करवाना चाहिए।
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‘फायर स्टेशनों और कर्मचारियों की भारी कमी’- नारायण सिंह पट्टा
कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त फायर स्टेशन नहीं है और कर्मचारियों की बारी कमी है। सरकार स्पष्ट करे कि पिछले 5 सालों में कितने नए स्टेशन खोले गए? ग्रामीण इलाकों में प्राथमिकता से नए स्टेशन खोले जाने चाहिए।
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