NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा आदेश देते हुए सभी 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ा दी। साथ ही अदालत ने कहा कि सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच (स्क्रूटनी) पूरी हो चुकी है। अब 7 अगस्त को अदालत यह तय करेगी कि मामले में आरोपपत्र पर संज्ञान लिया जाए या नहीं।

आरोपपत्र की हार्ड कॉपी की मांग

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि आरोपपत्र की सॉफ्ट कॉपी उन्हें उपलब्ध करा दी गई है, लेकिन करीब 20 हजार पन्नों के दस्तावेजों का अध्ययन न्यायिक हिरासत में केवल पेन ड्राइव के जरिए करना व्यावहारिक नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता ए.पी. सिंह ने आरोपियों को दस्तावेजों की हार्ड कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की और अध्ययन के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 18 अगस्त तय की।

ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने को तैयार आरोपी

बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि सभी आरोपी स्वेच्छा से ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) और अन्य वैज्ञानिक जांच कराने के लिए तैयार हैं। इस संबंध में दायर याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है और 10 अगस्त को आदेश सुनाने की बात कही है।

सीबीआई ने किया विरोध

सीबीआई ने आरोपियों की इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की गई है, इसलिए इस तरह की याचिकाओं से सुनवाई में अनावश्यक देरी होगी। सीबीआई ने ऐसे आवेदन पर लागत (कॉस्ट) लगाने की भी मांग की।

360 गवाह और 422 दस्तावेजों पर आधारित चार्जशीट

सीबीआई ने 13 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है। चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच का अहम आधार हैं।

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