Haryana 60 Years : हरियाणा। एक नवंबर 1966 को देश के नक्शे पर हरियाणा ने अलग राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। उस समय प्रदेश के सामने विकास की कई चुनौतियां थीं। गांवों में कच्ची सड़कें थीं, शहरों में अस्पताल और कॉलेज सीमित थे और खेती ही अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार थी। अब 60 साल बाद हरियाणा की तस्वीर काफी बदल चुकी है। उद्योगों का विस्तार हुआ, शहरों का दायरा बढ़ा और शिक्षा, खेल तथा सरकारी सेवाओं में भी बदलाव देखने को मिला।
हरियाणा के इस छह दशक के सफर को उन तीन नेताओं ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया, जिनका जन्म भी वर्ष 1966 में हुआ था। पूर्व विधायक नैना चौटाला, सीमा त्रिखा और शशि रंजन परमार ने अपने बचपन और राजनीतिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने प्रदेश को किस तरह बदलते देखा।
हिसार में सुविधाएं थीं सीमित, अब बढ़े अस्पताल और शिक्षण संस्थान
पूर्व विधायक नैना चौटाला का जन्म 15 अक्टूबर 1966 को हिसार के दरौली गांव में हुआ था। उन्होंने बचपन के हिसार और आज के शहर के बीच आए अंतर को बताया। उनके मुताबिक, उस दौर में हिसार में एक ही अस्पताल था और कॉलेजों की संख्या भी बहुत कम थी। पढ़ाई और खेलकूद के अवसर सीमित थे।
नैना चौटाला खुद निशानेबाजी से जुड़ी रही हैं। उन्होंने बताया कि उस समय खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए आज जैसी सुविधाएं नहीं मिलती थीं। अब हरियाणा के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं। खेलों के क्षेत्र में प्रदेश की पहचान मजबूत हुई है।
उन्होंने गुरुग्राम और फरीदाबाद के विकास का भी जिक्र किया। कभी छोटे शहरों के रूप में पहचाने जाने वाले ये इलाके आज बड़े शहरी केंद्र बन चुके हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है। नैना चौटाला ने महिलाओं की राजनीति में बढ़ती भागीदारी को भी बड़े सामाजिक बदलाव के रूप में देखा।
खेती के साथ उद्योगों ने भी बढ़ाए रोजगार के रास्ते
पूर्व विधायक सीमा त्रिखा के अनुसार, हरियाणा की पहचान लंबे समय तक खेती, सैनिकों और खेलों से जुड़ी रही। लेकिन छह दशक में प्रदेश की आर्थिक तस्वीर में बड़ा बदलाव आया है। कृषि के साथ औद्योगिक गतिविधियां बढ़ीं और रोजगार के नए अवसर बने।
उन्होंने बताया कि दिल्ली से सटे होने का फायदा भी हरियाणा को मिला। राजधानी के आसपास होने के कारण प्रदेश में आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों का विस्तार हुआ। दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में हरियाणा पहुंचे।
सीमा त्रिखा ने सरकारी सेवाओं में हुए बदलाव का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, सरकारी कामकाज में तकनीक और डिजिटलीकरण का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे लोगों को सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में बदलाव आया है और बिचौलियों की भूमिका कम करने की कोशिश हुई है।
सड़क और नहरों के निर्माण ने बदली विकास की रफ्तार
पूर्व विधायक शशि रंजन परमार ने हरियाणा के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि राज्य गठन के समय प्रदेश विकास के कई मोर्चों पर पीछे था। उस समय सड़क, सिंचाई और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार बड़ी जरूरत थी।
परमार के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के कार्यकाल में सड़कों और नहरों के निर्माण को गति मिली। इसके बाद आई सरकारों ने भी अपने-अपने समय में विकास कार्य किए। उनका मानना है कि आज का हरियाणा किसी एक सरकार का नहीं, बल्कि अलग-अलग दौर में हुए प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने सरकारी व्यवस्था में आए बदलाव की ओर भी ध्यान दिलाया। पहले नौकरी और तबादले जैसे कामों के लिए नेताओं के पास लोगों की भीड़ लगती थी। अब सरकारी कामकाज में नियमों और नीतियों की भूमिका पहले से बढ़ी है।
छह दशक में गांवों से महानगरों तक पहुंचा हरियाणा
हरियाणा की 60 साल की यात्रा में खेती से उद्योगों तक, सीमित शैक्षणिक संस्थानों से बढ़ते शिक्षा केंद्रों तक और छोटे शहरों से बड़े शहरी इलाकों तक का बदलाव शामिल है। तीनों नेताओं के अनुभव बताते हैं कि प्रदेश ने बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, खेल और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्रों में लंबा सफर तय किया है। हालांकि, इस बदलाव के पीछे अलग-अलग समय की सरकारों और उनके फैसलों की भी भूमिका रही है।
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