रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग को 4 साल से भी ज्यादा समय बीत चुका है। दोनों देश एक दूसरे पर ड्रोन्स से लेकर मिसाइल अटैक कर रहे हैं जिसमें अबतक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। दोनों में से कोई भी देश झुकने को तैयार नहीं है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक साथ बैठ के बात करने का न्योता दिया था। हालांकि, एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।

जेलेंस्की ने क्या ऑफर दिया था?

दरअसल, इससे पहले वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नाम एक खुला खत लिखा था। इस खत में जेलेंस्की ने कहा- “जब आप (पुतिन) 26 साल से भी पहले रूस में सत्ता में आए थे, तब यूक्रेन के कई लोग आपको पॉजिटिव रूप से देखते थे। ऐसा ही था। लेकिन अब वह पुरानी बात हो गई है। अब, यूक्रेन के ज्यादातर लोग इस बात को पॉजिटिव तौर पर देखते हैं कि हमारे लंबी दूरी के ड्रोन ने सेंट पीटर्सबर्ग में आपके मंच के उद्घाटन के दौरान 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। आप अच्छे से जानते हैं, यह दूरी हमारी ताकत की सीमा नहीं है। यूक्रेन सभी युद्धबंदियों एक्सचेंज के लिए तैयार है, और यह जंग को खत्म करने की दिशा में एक अच्छा कदम साबित हो सकता है। युद्ध के दौरान ले जाए गए नागरिकों और बच्चों की वापसी के लिए गंभीर कदम उठाए जाने चाहिए।”

जेलेंस्की ने कहा- “हमें यह निर्धारित करना होगा कि हमारे बाद आने वाली यूक्रेनी और रूसी पीढ़ियों का भविष्य कैसा होगा। यदि आप व्यक्तिगत तौर पर इस परिणाम पर नहीं पहुंचते हैं कि इस जंग को खत्म करने का वक्त आ चुका है, तो यूक्रेन अपने अस्तित्व के लिए लड़ता रहेगा। हमारे साथ वे लोग होंगे जो हमारा सपोर्ट करेंगे। लेकिन आपको भी अपने अस्तित्व के लिए और भी ज्यादा संघर्ष करना होगा – रूस के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए। और यह धमकी न तो मेरी ओर से है और न ही यूक्रेन की ओर से। यह रूसी इतिहास का एक तथ्य है जिसे आप अच्छी तरह जानते हैं: जब रूस थक जाता है, तो बदलाव आता है। हम उस थकान की ओर काम कर सकते हैं। आप अपना युद्ध रोक सकते हैं।”

आपके संसाधन काफी कम हो रहे- जेलेंस्की

जेलेंस्की ने कहा- “आप अभी भी रूस के लोगों को इस तरह जीने के लिए मजबूर कर सकते हैं। लेकिन आपके संसाधन काफी कम हो रहे हैं। आपके पास रूस के लोगों की वफादारी को उस तरह से खरीदने के लिए पर्याप्त धन या राजनीतिक पूंजी नहीं होगी, जिस तरह से आपने पिछले 26 वर्षों से किया है। और हम यह सुनिश्चित करने की हर संभव कोशिश करेंगे कि दुनिया उस वक्त को करीब लाने में मदद करे।”

जेलेंस्की ने कहा- “जैसा कि आप खुद कहना पसंद करते हैं, “हमें आंकड़ों की जांच करनी होगी।” कल, मुझे मई के दौरान यूक्रेन मोर्चे पर आपकी सेना के नुकसान की एक रिपोर्ट मिली। एक बार फिर, मारे गए और गंभीर रूप से घायल रूसी सैनिकों की संख्या 30,000 से अधिक हो गई है। हम महीने दर महीने इस स्तर को बनाए रख रहे हैं, और हमारे पास आपके हर नुकसान का वीडियो प्रुफ है- ये बेकार के दावे नहीं हैं। हम जानते हैं कि आपके युद्धक्षेत्र में होने वाली हानियों में से 63 प्रतिशत सैनिक मारे जाते हैं, जबकि केवल 37 प्रतिशत घायल होते हैं। 21वीं सदी में कोई भी सेना इस अनुपात को बर्दाश्त नहीं कर सकती। और मृतकों का अनुपात लगातार बढ़ता रहेगा। ऐसा नहीं है कि यूक्रेन रूस के सैनिकों के भाग्य को लेकर चिंता में है। लेकिन मैं यूक्रेनियों की परवाह करता हूं।”

पुतिन ने ब्रिक्स पर क्या कहा?

वहिं दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ब्रिक्स संगठन की जमकर तारीफ की है। पुतिन ने कहा- “अगर आप बीते 5 वर्षों की ग्लोबल जीडीपी के रुझान को देखेंगे, तो आप पाएंगे कि इसकी वार्षिक वृद्धि का करीब आधा हिस्सा, 49%, ब्रिक्स देशों के कारण है। जबकि तथाकथित ‘सात देशों के समूह’ के योगदान का अनुमान 18% है। पर्चेजिंग पावर पैरिटी के आधार पर ग्लोबल जीडीपी में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 40% है, जबकि जी7 देशों की हिस्सेदारी 29% से कम है। इसलिए ब्रिक्स ने जी7 देशों को पीछे छोड़ दिया है, और यह उपलब्धि उसने 2020 में ही हासिल कर ली थी, लेकिन यह अंतर बढ़ रहा है। ब्रिक्स के पक्ष में यह अंतर और बढ़ने की उम्मीद है।”

भारत पर क्या बोले पुतिन?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस दौरान भारत को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा- “हमारा एक और महत्वपूर्ण साझेदार भारत है, जो IT उद्योग में सबसे आगे चल रहे देशों में से एक है। ग्लोबल सॉफ्टवेयर मार्केट में इसकी काफी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।” पुतिन ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की आदत की जमकर तारीफ की है। पुतिन ने ये भी कहा है कि भारत के साथ रूस का व्यापार जल्द ही 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। आपको बता दें कि भारत साल 2026 में ब्रिक्स देशों के वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। व्लादिमीर पुतिन इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए 12 और 13 सितंबर को भारत की यात्रा पर आने वाले हैं।

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