NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी हैं। जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने अपने छात्रों और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर जारी पोस्ट में छात्रों से अपील की है कि वे जंतर-मंतर पर आयोजित किसी भी गैर-कानूनी जमावड़े या प्रदर्शन का हिस्सा बनने से बचें। विश्वविद्यालय ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए छात्रों को सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

DU की आधिकारिक चेतावनी

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने अपनी आधिकारिक एडवाइजरी में कहा है कि छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने याद दिलाया कि जंतर-मंतर पर किसी भी प्रकार के धरने, प्रदर्शन या जमावड़े का आयोजन माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और लागू नियमों के तहत नियंत्रित होता है। ऐसे में बिना अनुमति या कानून का उल्लंघन करते हुए किसी भी सभा में शामिल होने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

विश्वविद्यालय ने अपने आधिकारिक एक्स (X) पोस्ट में कहा, “कृपया ध्यान दें कि जंतर-मंतर पर कोई भी गैर-कानूनी सभा या प्रदर्शन कानूनी कार्रवाई को न्योता दे सकता है। इससे आपकी सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है और आपके करियर पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।” डीयू प्रशासन ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को लेकर भी छात्रों को सतर्क रहने की सलाह दी। विश्वविद्यालय ने कहा कि माहौल बिगाड़ने के उद्देश्य से फर्जी और गुमराह करने वाली खबरें बड़े पैमाने पर प्रसारित की जा रही हैं। ऐसे में छात्र किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें, अफवाहों से दूर रहें और कानून का पालन करते हुए अपनी पढ़ाई तथा शैक्षणिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करें।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने जहां एक ओर छात्रों और शिक्षकों से प्रदर्शन से दूर रहने की अपील। विश्वविद्यालय ने कहा कि शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए तथा छात्रों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए वांगचुक को अपना अनशन समाप्त कर देना चाहिए, क्योंकि “छात्रों का भविष्य ही देश का भविष्य है।” इसके साथ ही, दिल्ली विश्वविद्यालय ने पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था किए जाने संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा का भी स्वागत किया। विश्वविद्यालय का कहना है कि ऐसे मामलों में शीघ्र न्यायिक प्रक्रिया से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होने के साथ-साथ युवाओं का व्यवस्था पर विश्वास भी बढ़ेगा।

शिक्षा मंत्री के समर्थन वाली पोस्ट पर बढ़ा विवाद

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेजों की भूमिका को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में कुछ कॉलेजों के प्राचार्यों और आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में पोस्ट साझा किए गए, जिसके बाद छात्रों और शिक्षकों के एक वर्ग ने इस पर आपत्ति जताई। बताया जा रहा है कि राजधानी कॉलेज के आधिकारिक एक्स (X) हैंडल से शिक्षा मंत्री के समर्थन में एक पोस्ट साझा की गई थी। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने वह पोस्ट हटा दी और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि इस घटना पर उन्हें गहरा खेद है। वहीं, शहीद भगत सिंह कॉलेज के प्राचार्य के एक्स (X) हैंडल पर अब भी शिक्षा मंत्री के समर्थन में पोस्ट मौजूद है। उस पोस्ट में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण से जुड़े सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया गया है।

शिक्षकों ने जताई आपत्ति

इस पूरे विवाद पर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों के एक वर्ग ने भी आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक मामलों में खुलकर किसी एक पक्ष का समर्थन करने से बचना चाहिए और उनका प्राथमिक उद्देश्य छात्रों की शैक्षणिक तथा मानसिक चिंताओं का समाधान होना चाहिए। मिरांडा हाउस की फैकल्टी सदस्य आभा देव हबीब ने इस मुद्दे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र केवल अपने सवालों के स्पष्ट और सीधे जवाब चाहते हैं, न कि राजनीतिक बयानबाजी। उनके मुताबिक, छात्रों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर जो अनिश्चितता और असमंजस का माहौल बना है, उसे दूर करना विश्वविद्यालय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को छात्रों के साथ संवाद बढ़ाने, उनकी शंकाओं का समाधान करने और शैक्षणिक माहौल को सामान्य बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि छात्रों का शिक्षा व्यवस्था और संस्थानों पर भरोसा कायम रहे।

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